मैथिली माँझी गीत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 14 जनवरी 2010

मैथिली माँझी गीत


" माँझी गीत "




हैया रे हैया रे हैया हैया रे, हैया रे हैया रे हैया हैया रे ----
लहरि उठल छमाछम हवा चलल सनन सन ,
मयुर मन नाचि उठल सावन में संग संग, अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया रे .............................


संग हमर मीत हमर माँझी के गीत हमर
नदिया के जल सन निर्मल पिरीत हमर
यौवन के चढ़ल रंग सावन में संग संग, अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया हैया रे ....................


सावन के रंग में सजनी नहायल
घुँघरू छमकी उठल झनकी उठल पायल
थिरकी रहल अंग अंग, सावन में संग संग, अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया हैया रे .....................


पिया बिनु चैन कहाँ चान बिनु रैन कहाँ
माँझी तों लेने चल प्रेमक हो देश जहाँ
बिरहा के फुजल अगन सावन में सँग सँग अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया रे .........................


- लल्लन प्रसाद ठाकुर -

कोई टिप्पणी नहीं: