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रविवार, 12 अगस्त 2012

फिर से रेल कर्मियों के बच्चों को नौकरी.


भारतीय रेलवे में सेवानिवृत्त की ओर से बढ़ रहे तमाम ऐसे रेलकर्मियों की ख्वाहिश है कि रेलवे भर्ती में अस्सी के दशक से पूर्व की प्रक्रिया अपनाई जाए.  दरअसल, अस्सी के दशक के पूर्व रेलकर्मियों के बच्चों को रेलवे में नौकरी मिलती थी और उनकी अगली पीढ़ी रेलवे से जुड़ी रहती थी. इस भर्ती प्रक्रिया को रेलवे के आयोग ने भी सही ठहराया था और अब मौजूदा रेल मंत्री भी इस प्रक्रिया को सही मान रहे हैं. ऐसे में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो एक बार फिर रेल भर्ती में पुरानी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है. 

इस संबंध में ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र का कहना है कि रेलवे में बदलते समय में बहुत कुछ बदला है, लेकिन अब करीब आठ फीसद ऐसे रेलकर्मी हैं जो सेवानिवृत्त होने के बाद अपने बच्चों को रेलवे में नौकरी चाहते हैं. उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में उनकी रेलमंत्री मुकुल राय से बातचीत हुई है.
रेलमंत्री भी रेलवे में सुरक्षा और संरक्षा को बेहतर बनाने के लिए किसी हद तक इन जरूरी पद पर स्थानीय स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया को पक्षधर दिखे हैं. यदि रेल मंत्रालय स्तर पर सभी नजरिए से पुरानी भर्ती प्रक्रिया व्यवस्था लागू करने में परिस्थितियां अनुकूल पाई गई तो जाहिर है कि ऐसे रेलकर्मियों की ख्वाहिश जरूर पूरी होगी, जो अपनी अगली पीढ़ी को रेल सेवा के रूप देखना चाहते हैं.

इस प्रक्रिया को रेलवे में गठित आयोग और समिति ने भी सही ठहराया है. उनका मानना था कि रेलकर्मियों के बच्चों को रेलवे में नौकरी में वरीयता मिलनी चाहिए, क्योंकि वे रेलवे को बेहतर समझते हैं. एक अनुमान के आधार पर भारतीय रेलवे में अगले वर्ष तक सेवारत रेलकर्मियों की संख्या और सेवानिवृत्त रेलकर्मियों की संख्या लगभग बराबर हो जाएगी. करीब 13.5 लाख रेलकर्मी ही रेल सेवा में बचेंगे. इस तरह से आने वाले समय में सेवानिवृत्त होने वाले रेलकर्मियों की संख्या ज्यादा होगी.

मौजूदा समय में भारतीय रेलवे में जिस तरह से गैंगमैन, प्वाइंट्स मैन, गेट मैन और रेलवे लाइनों पर पेट्रोलिंग करने वाले पदों पर रेलवे भर्ती आयोग की ओर से जोनल रेलवे स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है. उसमें इस पद के लिए जितनी योग्यता चाहिए, उससे अधिक योग्यता वाले अभ्यर्थी आ रहे हैं. नौकरी पाने के कुछ दिनों बाद ये रेलवे में टिकट कलेक्टर, सहायक स्टेशन मास्टर, लिपिक आदि के पद पर पदोन्नति चाहते हैं और जहां उनकी तैनाती होती है वे अपने मूल जिले के लिए स्थानांतरण चाहते हैं. ऐसे में इन हालातों में रेलवे का कामकाज कहीं न कहीं प्रभावित होता है. जहां तक रेलवे में इन पदों के लिए पुरानी रेलवे भर्ती की प्रक्रिया थी, उसके मुताबिक स्थानीय स्तर पर भर्ती की जाती थी. इसके लिए स्थानीय रोजगार कार्यालयों से अभ्यर्थियों के आवेदन मांगे जाते थे. सौ पदों के लिए पांच सौ नाम वहां से मंगाए जाते थे और इस प्रक्रिया में रेलकर्मी भी अपने बच्चों की भर्ती के लिए आवेदन करते थे.

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