बेगूसराय में विशाल जन सैलाब ने कन्हैया का स्वागत किया

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अरुण कुमार,मटिहानी,बेगूसराय। हाल ही में मोदी सरकार के फूहड़पन की वजह से राष्ट्रिय फलक पर उभरने वाला जे एन यू छात्र नेता कन्हैया आज बी जे पी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है,बेगूसराय की धरती पर आज कन्हैया का विशाल जन सैलाब ने स्वागत किया,इस ऐतिहासिक भीड़ को देखकर ये अनुमान लगाया जा सकता है कि कन्हैया अब कोई साधारण छात्र नेता नहीं रहा बल्कि वर्तमान और आने वाली राजनीति का दिशा निर्धारक हो गया है।आज कन्हैया की सभा में किसी भी विपक्षी पार्टी का विरोध नहीं करना भविष्य की राजनीती और रणनीति में परिवर्तन का संकेत छोड़ जाता है।ये गर्भस्थ संकेत आने वाला वक़्त की राजनीति ही बताएगा जो चौंकाने वाला होगा,खैर। सूत्रों की मानें तो कन्हैया की सभा में किसी प्रकार का कोई विरोध ना हो इसका आदेश छात्र नेता के खिलाफ विरोध की भाषा बोलने वाले किसी हाइ कमान ने ही दिया था।तिहाड़ जेल से छूटने के बाद  कन्हैया पहली बार अपने गृह ज़िला बेगूसराय पहुँचे। लोगों का स्नेह और जोश देखकर वे अभिभूत थे। मोकामा पूल से लेकर गाँव बीहट तक, बीहट से लेकर बेगूसराय तक कतारबद्ध होकर लोग अभिनंदन कर रहे थे।कार्यक्रम के आरंभ में शहीद जवानों व एआइएसएफ के एक किशोर साथी मो. आरजू के असामयिक मौत पर दो मिनट का मौन रखा गया कन्हैया ने कॉलेजिएट हाइस्कूल के मैदान में अपार भीड़ के बीच अपने भाषण की शुरूआत में कहा, "बेगूसराय की धरती राष्ट्रकवि पैदा करती है,राष्ट्रद्रोही नहीं। गंगा के किनारे पैदा हुआ यमुना के किनारे पढ़ता हूँ। बेगूसराय की जो धरती आर.एस. शर्मा जैसे इतिहासकार पैदा करती है,यक़ीन मानिए उसी धरती का आपका बच्चा मिट जायेगा,मगर इस सरकार को देश का इतिहास बदलने नहीं देगा, गंगा-जमुना की तहज़ीब को नस्तनाबूत नहीं करने देगा।"

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आगे उन्होंने कहा झोपड़ी की चर्चा नहीं महल का नारा गाँधी जी की पूजा करे, गाँधी का हत्यारा गोडसे को शहीद मानने वाले लोग अफज़ल पर बात करते हैं। हम दोनों को अपराधी मानने वाले लोग हैं। पता नहीं यह सरकार झूठ की खेती करना कब बंद करेगी। बढ़ती मंहगाई पर भी जबरदस्त हमला किया,दाल एवं सब्ज़ी की बढ़ती कीमत 8स अंधी सरकार को नहीं दिख रही है,इस सरकार में आमीर,अमीर होता हा रहा है और गरीब,गरीब होता जा रहा है किसान आत्महत्या बंद कर अपनी पहचान 'कृषिकार्य' को तन्मयता से कर सकें ऐसी पहल नहीं करती है ये सरकार, पूँजीपतियों की तलवे चाटने वाली है ये सरकार।दुबले-मोटे,ग़रीब -अमीर, सबके वोट की क़ीमत में जब कोई फर्क नहीं है,तो उनके बाल-बच्चों की शिक्षा में फर्क क्यों ? बिरसा,सिदो कान्हू,बाबा साहेब व सावित्रीबाई से प्रेरणा लेते हुए सामाजिक व लैंगिक न्याय सुनिश्चित करते हुए समतामूलक समाज की स्थापना का संकल्प दुहराया।कन्हैया ने दिनकर को याद करते हुए कहा शांति नहीं तब तक जब तक सुख-भाग न नर का सम हो नहीं किसी को बहुत अधिक हो नहीं किसी को कम हो।उन्होंने मोदी जी की ठगबुद्धि की कला पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी जी,आपने चाय बेची या नहीं, हमें नहीं मालूम,मगर आपका यही रवैया रहा, तो आप एक दिन देश ज़रूर बेच देंगे। ईस्ट इंडिया कम्पनी और 'मोदी एंड कम्पनी' में कोई अंतर नहीं रह गया है। काला धन, महंगाई आदि के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब एक-एक चीज़ राजनीति से तय हो रही है, तो आपको अपनी राजनीति तय करनी पड़ेगी।बात बदलने से,जुमला छेड़ने से बात नहीं बनती,सामाजिक बदलाव से देश बदलता है। जो लोग मटन बदल देने से,वीडियो बदल देने से सोचते हैं कि देश बदल रहा है,वो जनता को बेवकूफ समझने की भूल कर रहे हैं ।

आख़िर में उन्होंने कहा कि जबतक आपके जैसे चाहनेवाले, सच बोलने पर पीठ ठोकने वाले हमारे भाई- बहन, दोस्त-अभिभावक हमारे साथ हैं, हमारा हौसला कभी कमज़ोर नहीं होने वाला। हम 'सबको शिक्षा,सबको काम' की लड़ाई मुस्तैदी से लड़ते रहेंगे एवं सामाजिक व साम्प्रदायिक सौहार्द स्थापित करने के लिए जान की बाजी लगा देंगे,मगर इस देशविरोधी सरकार के कुकृत्यों व जनविरोधी नीतियों की रेल खोलना बंद नहीं करेंगे।उन्होंने दिनकर, बाबा साहेब, सुभाषचंद्र बोस, कॉमरेड चंद्रशेखर, कॉमरेड सूर्यनारायण सिंह, सरदार पटेल व  कॉमरेड चंदेश्वरी सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अन्याय के ख़िलाफ़ जारी जंग में और भी ऊर्जा डालने का संकल्प दुहराया।कार्यक्रम के प्रारम्भ में इप्टा के कलाकारों ने  जनवादी गीत गाये।बेगूसराय पुलिस ने सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया था,सभा स्थल पुलिस छावनी में तब्दील थी एवं शहर के चप्पे चप्पे में पुलिस की मौजूदगी के कारण भी कार्यक्रम शांतिपूर्ण सम्पन्न हुआ।
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