लालू के लिए बेनामी जमीन खरीदती है ए. के. इंफोसिस्टम्स : सुशील मोदी

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पटना 18 अप्रैल, बिहार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधानमंडल दल के नेता एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव एवं उनके परिवार के कथित जमीन घोटाला मामले में एक और खुलासा करते हुये आज कहा कि कात्याल परिवार ने श्री यादव के लिए बेनामी जमीन खरीदने के उद्देश्य से ही कंपनी ए. के. इफोसिस्टम्स बनाई थी। श्री मोदी ने यहां जनता दरबार के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, “बिहटा में शराब कारखाना लगाने में मदद देने के एवज में उद्योगपति ओमप्रकाश कात्याल परिवार द्वारा बनाई गई कंपनी ए.के.इंफोसिस्टम्स का उद्देश्य केवल तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के लिए बेनामी जमीन खरीदना था ताकि भविष्य में जमीन समेत पूरी कंपनी लालू परिवार को सौंपी जा सके।” भाजपा नेता ने कहा कि ए. के. इंफोसिस्टम्स ने मार्च 2007 में 39 लाख रुपये में पटना के पानापुर में 28.57 डिसमिल और चितकोहरा में 43 डिसमिल यानि कुल 72 डिसमिल जमीन खरीदी। इसके अलावा इस कंपनी ने श्री यादव के दोनों मंत्री पुत्रों तेजप्रताप यादव (पर्यावरण एवं वन मंत्री) और तेजस्वी यादव (उप मुख्यमंत्री) को उनके चाचा (श्री यादव के भाई) प्रभुनाथ यादव से उपहार में मिली 13 लाख रुपये मूल्य की सलेमपुर डुमरा में दो कट्ठा एक धुर जमीन समेत उस पर बने दो मंजिला मकान को 70 लाख रुपये में खरीद ली। इस संपत्ति को खरीदने के लिए ओमप्रकाश कात्याल ने ए. के. इंफोसिस्टम्स को 80 लाख रुपये और अमित कात्याल ने 35 लाख रुपये (कुल एक करोड़ 15 लाख रुपये) कर्ज के तौर पर दिये।


पूर्व उप मुख्यमंत्री ने श्री यादव पर इस कंपनी के जरिये कालाधन को छुपाने के लिए मदद देने के एवज में कंपनी बनवाकर जमीन में निवेश करने और फिर उस कंपनी को अपने परिवार के नाम करने का आरोप लगाते हुये कहा, “प्रभुनाथ यादव से उपहार में मिली संपत्ति में 26 जुलाई 2006 को मकान का मूल्य छह लाख 95 हजार रुपये और जमीन की कीमत छह लाख पांच हजार रुपये घोषित की गई्”। उन्होंने कहा कि महज 45 माह बाद ही इस 13 लाख रुपये की संपत्ति को ए. के. इंफोसिस्टम्स ने करीब 70 लाख रुपये में खरीद ली। इस दौरान मकान का मूल्यांकन 54 लाख 25 हजार रुपये और जमीन की कीमत 16 लाख पांच हजार रुपये बताई गई। श्री मोदी ने कहा कि उपहार में मिले छह लाख 95 हजार रुपये के मकान को कात्याल परिवार की कंपनी को नौ गुणा अधिक दाम पर 54 लाख 25 हजार रुपये में बेच दिया गया। इस प्रकार लालू परिवार को जमीन के एवज में 70 लाख रुपये भी मिल गये और जमीन भी उस कंपनी के पास रह गई, जिसकी शत-प्रतिशत हिस्सेदारी वर्ष 2014 में कात्याल परिवार ने लालू परिवार को दे दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ए. के. इंफोसिस्टम्स में 85 प्रतिशत शेयर पूर्व मख्यमंत्री और श्री यादव की पत्नी राबड़ी देवी और 15 प्रतिशत हिस्सेदारी पर्यावरण एवं वन मंत्री तेजप्रताप यादव के पास है। इसके अलावा श्री यादव की पुत्री रागिनी लालू और चंदा यादव इस कंपनी की निदेशक हैं। भाजपा नेता ने लालू परिवार के खिलाफ उनकी ओर से लगाये जा रहे आरोपों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से चुप्पी तोड़ने का आग्रह करते हुये कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री के लिए जरूरी हो गया है कि बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम के तहत राजद अध्यक्ष परिवार की आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच करा कर उसे जब्त कराने की पहल करें। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के लिए वह प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और केंद्रीय जांच ब्यूरो का दरवाजा भी खटखटाएंगे। 


पूर्व उप मुख्यमंत्री ने सवालिया लहजे में कहा कि स्वयं को भूमिहीन बताने वाले प्रभुनाथ यादव के पास राजधानी पटना में इतनी जमीन कहां से आई। साथ ही उनके पास उस जमीन पर मकान बनाने के लिए पैसे कहां से आये। उन्होंने अपनी जमीन और मकान महज 13 लाख रुपये में राजद अध्यक्ष के दोनों मंत्री पुत्रों को उपहार में क्यों दे दिया। श्री मोदी ने कहा कि बिहटा में शराब फैक्ट्री लगाने वाले कात्याल परिवार ने श्री यादव के रेल मंत्री के कार्यकाल में ही ए. के. इंफोसिस्टम्स का गठन क्यों किया। इस कंपनी ने लालू परिवार के लिए जमीन खरीदने के अलावा कोई दूसरा कारोबार क्यों नहीं किया। कात्याल परिवार ने इस कंपनी को एक करोड़ 15 लाख रुपये का कर्ज क्यों दिया। साथ ही कात्याल परिवार ने ए. के. इंफोसिस्टम्स की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी लालू परिवार को क्यों सौंप दी। भाजपा नेता ने कहा कि घोटाले की राह पर चलकर श्री यादव ने अपनी जिंदगी तो बर्बाद कर ही ली और अब अपने बच्चों को भी उसी राह पर चलाकर उनका जीवन भी तबाह करने में लगे हुये हैं। उन्होंने कहा कि राजद अध्यक्ष ने अपने बच्चों को पढ़ने-लिखने की उम्र में घोटाला करके उन्हें करोड़ो रुपये की जमीन का मालिक बना दिया। 
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