पिछड़ों की तरक्की को हमेशा रोका है कांग्रेस ने : भाजपा

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भुवनेश्वर.16 अप्रैल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पिछड़ी जातियों के कल्याण एवं उन्हें सशक्त बनाने के मुद्दे को राजनीतिक रंग दे दिया है तथा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिये जाने के लिये पेश विधेयक को संसद से पारित होने से रोकने की भर्त्सना करते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस हमेशा से पिछड़े वर्ग को कमज़ोर बनाये रखना चाहती है। भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आज यहां पारित इस आशय के एक प्रस्ताव की जानकारी देते हुए वरिष्ठ पार्टी नेता एवं केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पिछड़ा वर्ग लंबे अरसे से मांग कर रहा था कि आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया जाये। उनका कहना था कि बिना संवैधानिक दर्जा मिले आयोग कारगर नहीं है। कांग्रेस ने 30 साल तक इस ओर ध्यान नहीं दिया। उसकी नीति रही है कि पिछड़ा वर्ग, मुसलमान, गरीब की बात एवं राजनीति करते रहो, पर उन्हें दो कुछ नहीं। मोदी सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग आयोग की भांति संवैधानिक दर्जा देने का प्रयास किया है। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। श्री जावड़ेकर ने कहा कि हैरानी की बात है कि संसद में विधेयक लाये जाने के कुछ दिन पहले पिछड़े वर्ग के अधिकतर सांसदों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात करके कहा था कि आप आयोग काे संवैधानिक दर्जा देने के लिये विधेयक लायें और हम सब समर्थन करेंगे। लोकसभा में इसे पारित कर दिया गया लेकिन राज्यसभा में इसे रोक दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समाज के बड़े तबके को सशक्त करने में अड़ंगा लगा रही है। सामयिक प्रस्ताव में समता मूलक समाज के निर्माण के लक्ष्य हासिल करने के लिये सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ी जातियों को उत्थान के वास्ते पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिये जाने के लिये पेश विधेयक का राज्यसभा में कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों द्वारा पारित होने से रोके जाने की कड़ी निंदा की गयी है और कहा गया है कि पार्टी कार्यकर्ता इस मुद्दे को जन-जन तक ले जायेंगे। श्री जावड़ेकर ने कहा कि प्रस्ताव में कहा गया है कि लोकसभा में इस आशय के संविधान संशोधन विधेयक पारित किये जाने के बावजूद राज्यसभा में कांग्रेस और विपक्षी दलों ने जिस तरह से उसका विरोध किया है, वह बेहद निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका यह विरोध पिछड़े वर्गों को लेकर उनकी मूल मनोस्थिति को दर्शाता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह सच है कि देश में लंबे समय तक शासन में रहने के बावजूद कांग्रेस पिछड़े वर्ग के हितों का यह काम नहीं कर पायी जिसकी शुरुआत भाजपा ने की है। आज़ादी के बाद काका कालेलकर आयोग एवं मंडल आयोग की रिपोर्ट के बावजूद कांग्रेस की सरकारों ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। प्रस्ताव में कहा गया है कि राजनीति में विरोध और आरोप-प्रत्यारोप होते रहते हैं लेकिन गरीब एवं हाशिये के लोगों के हितों के किसी फैसले को अपनी राजनीति के लिये रोकना कहीं से भी उचित नहीं है। भाजपा ने सभी कार्यकर्ताओं एवं सामाजिक संस्थाओं से समता मूलक समाज के निर्माण के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस ऐतिहासिक फैसले के महत्व को दूर दराज के गरीबों एवं पिछड़ों तक पहुंचाने का आह्वान किया है। इसके साथ ही पार्टी ने कहा है कि विपक्षी दलों के पिछड़ा वर्ग विरोधी आचरण का पर्दाफाश किया जाना चाहिये। भाजपा ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिये जाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि इससे पिछड़े वर्ग को न्याय मिलेगा। मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग एक साधारण कानूनी निकाय है जिसका कार्य सरकार को जातियों की सूचियों में शामिल करने या निकालने के संबंध में सलाह देना है। अब इस आयोग को संवैधानिक निकाय के रूप में अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के समान अधिकार देने का प्रयास किया गया है। यह आयोग पिछड़े वर्गों के संरक्षण कल्याण एवं विकास तथा उन्नति से संबंधित कार्यों का भी निर्वहन करेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले संसदीय सत्र के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी विधेयक को लोकसभा में पारित किये जाने के बाद राज्यसभा में पेश किया गया था लेकिन कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों के कड़े विरोध के कारण इसे प्रवर समिति को सौंप दिया गया था।

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