बनेगा कानून ताकि सस्ती दवा लिखें डाक्टर : प्रधानमंत्री

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सूरत/सिलवासा 17 अप्रैल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि उनकी सरकार ऐसा कानून बनायेगी जिससे डाक्टरों के लिए सस्ती जेनरिक दवाएं ही पर्ची पर लिखना अनिवार्य हो जाएगा, उन्होंने लोगों से इस भ्रम को भी दूर करने का आहवान किया कि सस्ती जेनरिक दवाएं उतनी कारगर नहीं होतीं जितनी कि महंगी दवाएं। श्री मोदी ने सिलवासा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सरकार ने करीब 800 दवाओं को सस्ता किया है और जगह जगह सस्ती जेनरिक दवाओं के स्टोर खोले जा रहे हैं। जेनरिक और अन्य दवाओं में कोई फर्क नहीं है। ऐसा नहीं है कि सस्ती होने की वजह से ये खराब हैं। इस तरह के भ्रम के चक्कर मे मत पडिये। सरकार ऐसे अफवाहों के जरिये गरीब और मध्यमवर्ग को लूटने नहीं देगी। श्री मोदी ने इससे पहले सूरत में 500 करोड की लागत से बने एक निजी अस्पताल के उद्घाटन के बाद कहा कि उनकी सरकार ने लोगों काे बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के लिए सस्ती दवाओं की उपलब्धता और जरूरी दवाओं के मूल्य तय करने समेत कई कदम उठाये हैं। इसी कडी में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के 15 साल बाद उनकी सरकार स्वास्थ्य नीति लेकर आयी है। देश में स्वास्थ्य क्षेत्र में डाक्टरों की कमी समेत कई समस्यायें थी। मध्यम वर्ग के परिवार में एक भी व्यक्ति के बीमार हो जाने से परिवार को पूरा अर्थतंत्र गडबड हो जाता है। मकान खरीदने और बेटी की शादी जैसे अन्य बेहद जरूरी काम रूक जाते हैं। उन्होंने कहा कि वह समाज के एक ताकतवर तबके की नाराजगी मोल लेकर भी गरीब और मध्यम वर्ग के लिए स्वास्थ्य सुविधा बढाने के प्रयास जारी रखे हुए हैं। उन्होंने 700 जरूरी दवाओं के दाम तय करने तथा हृदय रोग के लिए जरूरी स्टेंट की कीमत घटाने का काम किया है। फिर भी अभी कई डाक्टर पर्चा लिखते है तो इस तरीके से लिख देते हैं कि मरीजों को महंगी दुकान पर जाना पडता है। पर जल्द ही वह ऐसा कानून बनायेंगे और व्यवस्था करेंगे कि डाक्टरो के लिए सस्ती जेनरिक दवाएं लिखना जरूरी होगा। श्री मोदी ने अपने खास लहजे में कहा कि मै गुजरात में था तो बहुत लोगों को नाराज करता था। अब दिल्ली में गया हूं तो भी लोगों को नाराज करता रहता हूं। रोज एक काम ऐसा करता हूं जिससे कोई ना कोई नाराज हो जाए। अब दवा कंपनियां मुझसे नाराज हैं। उन्होंने अपने स्वच्छता अभियान को भी स्वास्थ्य से सीधे तौर पर जुडा बताया। श्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद से देश में ऐसा माहौल बन गया था कि सब कुछ सरकार को ही करना चाहिए जबकि पुरातन समय से समाज के काम जनशक्ति के जरिये करने की परंपरा था। एक बार फिर यह भावना वापस जाेर पकड रही है। उन्होंने उक्त अस्पताल का शिलान्यास तथा उद्घाटन दोनो स्वयं करने की चर्चा करते हुए कहा कि देश में केवल योजनाओं का शिलान्यास करने का फैशन बन गया था। वह इसे खत्म करना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि वह जुलाई माह में जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री के पहले इजरायल दौरे पर जायेंगे तो सूरत के हीरा उद्योग के प्रतिनिधि बन कर भी जायेंगे।

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