बिहार : तनवीर अख्तर एमएससी के नेतृत्व में सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात।

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पटना। तनवीर अख्तर एमएससी के नेतृत्व में सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात। फादर प्रेम, सिसिल साह आदि उपस्थित। ईस्टर पर्व की शुभकामनाएं। सीएम ने भी ईसाई समुदाय को ईस्टर की बधाई दी।  ईसा मसीह के दुखभोग खत्म। ईसा मसीह मृतकों में जी उठते हैं। ईस्टर पर्व भी खत्म। चालीसा अवधि में माता कलीसिया द्वारा विवाह करने पर प्रतिबंध समाप्त। अब ईसाइयों का जश्न शुरू हो गया है। चैदह मुकाम की झांकी में येसु मसीह की भूमिका अदा करने वाले विक्टर फ्रांसिस ने कहा कि येसु मसीह मरे नहीं मगर आज भी जीवित हैं। इसका मतलब येसु मसीह चले गये और उनके मार्ग पर चलकर कार्य करने वाले विराजमान होकर कार्य कर रहे हैं। यह सच भी है। तब येसु मसीह बीमारों को चंगा कर देते थे। अब भव्य हाॅस्पीटल खोल दिया गया है। इसके सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से बीमारों को चंगा करने का कार्य बदस्तूर जारी है। येसु मसीह चमत्कार कर रोगग्रस्त को ठीक कर देते थे। अब करिश्माई केन्द्र खोला गया है। रोगग्रस्त पर प्रार्थना के बल पर चमत्कारिक ढंग से ठीक किया जा रहा है। येसु मसीह अनौपचारिक ढंग से लोगों को शिक्षित किया करते थे। अब औपचारिक एवं अनौपचारिक ढंग से शिक्षा दी जा रही है। आलिशान भवनों में शिक्षित की जाती है। माॅटेंसरी, प्राइमरी,हाई,काॅलेज,महाविश्वविघालय,नर्सेंज ट्रेनिंग सेंटर,पारा मेडिकल सेंटर, जूनियर डाॅक्टरों को शिक्षित किया जाता है। ईश मंदिरों में उपदेश देते थे। अब भव्य चर्च निर्माण किया गया है। इसमें लोगों को बैठाकर उपदेश दिया जा रहा है। जल संस्कार दिया ही जा रहा है। पूजा पाठ किया ही जा रहा है। इसका मतलब येसु मसीह का कार्य निरंतर जारी है। येसु मसीह अन्याय के विरूद्ध आवाज बुलंद करते थे। इसी कारण डर समा गया कि हमलोगों के बराबरी कर राजा बन जाएगा। इसी बातों को आधार बनाकर साबित करने का प्रयास किया जाता है कि येसु मसीह जीवित हैं। 


उस समय और इस समय में काफी अन्तर है। उस समय येसु मसीह पेशेवर नहीं थे। अभी पूर्णतः पेशेवर हो गये हैं। बिना पैसे के काम नहीं होता है। पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा ने बाजाप्ता धार्मिक कार्यों को इतिश्री करने के लिए रेट निर्धारित कर दिये हैं। इसी रेट के अनुसार धार्मिक कार्य किया जाता है। भव्य हाॅस्पीटल गरीबों से दूर हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सैम्पल दवाई देकर समाज सेवा किया जा रहा है। अन्याय के विरूद्ध आवाज उठाने वालों को सजा दी जाती है। अगर नौकरी में है तो नौकरी से निकाला। अगर नौकरी में नहीं हैं तो गुगों से पिटाई भी करा दी जाती है। अब तो ईश मंदिर को चन्दालय बना दिया गया है। हर मूर्ति के नीचे दान पेटी लगा दी गयी है। ऐसा प्रतीत होता है कि बिना दान दक्षिणा के काम होने वाला नहीं है।
यह जरूर है कि आवाज उठाने के बाद सुधार किया गया है। 

- स्कूलों में दाखिला के समय में बपतिस्मा प्रमाण-पत्र के अलावे वैकल्पिक प्रमाण -पत्र जन्म तिथि में मान्य है। अस्पताल,नगर निगम और शपथ पत्र दिये जा सकते हैं। 
- मिशनरी स्कूलों में ईसाई बच्चों को नामांकन हो जाता है। कुछ शिकायत विराजमान है। इसमें सुधार करने की जरूरत है।
- अ से आया, बी से बार्वची,सी से चम्मचा,डी से दरवान में कार्यरत लोगों को पदोन्नत दिया जा रहा है। योग्यता के आधार पर नौकरी में प्राथमिकता। 
- जहां पर सुविधा है वहां पर वहीं के लोगों को प्रमुखता से प्रशिक्षण केन्द्रों में बहाली की जा रही है। पहले कुर्जी अस्पताल में छोटानागपुरिया को एएनएम और मलयालम बोलने वालों को जेनरल नर्सिंग में प्रशिक्षण दिया जाता था। इसमें बदलाव आ गया है। स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण में शामिल किया जा रहा है।
-येसु समाज में दलितों को भी पुरोहित बनाया जा रहा है।पहले दलितों का चयन नहीं किया जाता था। केवल धर्मप्रांतीय पुरोहित बनते थे।

अभी सुधार की जरूरत है
जिस स्कूल में बच्चे नामांकन ले रहे हैं उसी स्कूल से मैट्रिक उत्र्तीण और हायर एडुकेशन पूर्ण करने का दायित्व स्कूल के जिम्मे हो। कई बहानों में कमजोर बच्चा करार कर स्कूल से बाहर कर दिया जाता है। इसमें सुधार हो। 
संविदा में बहाली बंद करों। शिक्षा के अधिकार के तहत ईसाइयों में गरीब बच्चों को शामिल कर पढ़ाई की व्यवस्था करों। 

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