उत्तर प्रदेश : सुलखान सिंह बने यूपी के डीजीपी

  • 1980 कैडर के यूपी के सबसे सीन‍ियर आईपीएस है सुलखान, तेज-तर्रार अफसरों में होती है गिनती, फर्जी मुकदमों व मनगढ़ंत जांचों के साथ-साथ बढ़ते अपराध को रोक पाने की होगी चुनौती, कहा, जनता का पुलिस पर भरोसा बढ़े, कानून व्यवस्था को दुरुस्त करना उनकी होगी प्राथमिकता 

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लखनऊ (सुरेश गांधी)। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुलखान सिंह को नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया है। वे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1980 कैडर के सबसे सीन‍ियर आईपीएस है। उनकी गिनती तेज-तर्रार अफसरों में की जाती है। वे जावीद अहमद की जगह लेंगे। खास यह है कि श्री सिंह का कार्यकाल मात्र पांच माह की ही होगा। ‍िसतंबर में ही उन्हें रिटायरमेंट होना है। श्री सिंह अभ्ज्ञी तक डीजी ट्रेनिंग के पद पर तैनात थे। मूलतः वह बांदा के रहने वाले है। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग के साथ लॉ की डिग्री भी हासि‍ल की है। सीनियॉरटी के लिहाज से उन्हें डीजीपी बनाया गया है। प्रस्तुत है सीनियर रिपोर्टर सुरेश गांधी से नए डीजीपी सुलखान सिंह की बातचीत पर आधारित एक विस्तृत रिपोर्ट - 


एक सवाल के जवाब में श्री सिंह ने कहा है कि अब माफियाओं एवं बाहुबलि जनप्रतिनिधियों के इसारों पर थानों में दर्ज होने वाले फर्जी मुकदमों व घटनाओं की मनगढ़ंत जांच रिपोर्ट तैयार करने वाले पुलिस आफिसरों पर कार्रवाई होगी। उनकी जांचोपरांत रिपोर्ट सही पाएं जाने पर संबंधित आफिसर को उनके द्वारा बर्खास्त करने में भी देर नहीं लगेगी। कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने में आ रही मुश्किलों को वह चुनौती के रुप में लेंगे। जिस किसी ने भी सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गुंडागर्दी किसी भी कीमत पर नहीं चलने दी जाएगी। चैराहों और सड़कों पर गुंडागर्दी कतई नहीं होने देंगे। थानों को फूंकना, पुलिस को पीटना अब नहीं चलेगा। 

बता दें, भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों एवं हौसलाबुलंद अपराधियों पर नकेल कसने के लिए योगी सरकार ने श्री सुलखान सिंह को पुलिस महानिदेशक पद पर तैनात तो कर दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वह पूर्व की बिगड़ी कानून व्यवस्था, बेलगाम अपराधियों, भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों, पैसे लेकर फर्जी मुकदमें दर्ज करने आदि मामलों में बिगड़ी पुलिस की छबि एवं इसमें संलिप्त पुलिसकर्मियों को सुधार पाएंगे। उत्पीड़न के शिकार आम गरीब व निरीह जनता को न्याय दिला पाऐंगे। क्योंकि इसके पहले जिन लोगों के हाथ में कमान थी, कितना सफल हुए हुए है यह सूबे के हालात व आंकड़े बता रहे है, मुझे कुछ बताने की जरुरत नहीं। हालांकि नवनियुक्त डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा है कि जिस किसी ने भी सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गुंडागर्दी किसी भी कीमत पर नहीं चलने दी जाएगी। वह डीजीपी मुख्यालय की हाल के दिनों में खोई गरिमा को वापस लाने की कोशिश करेंगे। फिरहाल जिस तरह यूपी पुलिस हाल के दिनों में सत्ता के बाहुबलि जनप्रतिनिधियों के हाथो कठपुतली बन कर रह गयी है। इन बाहुबलियों के इसारे मात्र से थानों में फर्जी रपट दर्ज कर पत्रकार सहित आम जनमानस को जिंदा जलाया गया। उनके घर-गृहस्थी लूटे गए। बलातकार के रसूखदार आरोपियों को संरक्षण दिया गया। सड़क से लेकर लोगों के घरों तक में घुसकर पुलिसिया रंगदारी वसूली गयी। फर्जी मुकदमों की जांच के नाम पर पीड़ितों को न्याय देने के बजाए आरोपियों से ही वसूली कर पीड़ितों को प्रताड़ित किया गया। कोतवाल संजयनाथ तिवारी, श्रीप्रकाश राय, आईपीएस अशोक शुक्ला जैसे भ्रष्ट व लूटेरे पुलिसकर्मियों को मलाईदार थानों व जिलों में पैसे लेकर नियुक्तियां की गयी, पर नकेल कस पायेंगे। यह बड़ा सवाल बन गया है। क्योंकि पूर्व के पुलिस अधिकारियों का वक्त बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने के बजाए अपनी कुर्सी सुरक्षित करने के लिए बाहुबलियों की परिक्रमा करने में ही बीता। जो भी हो उनके सामने बड़ी चुनौती पश्चिमी और पूर्वी यूपी के सांप्रदायिक माहौल को दुरुस्त करना और नगर निकाय चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से कराने के साथ बाहुबलि जनप्रतिनिधियों एवं भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के बीच बने गठजोड़ को तोड़ना है। पिछले कुछ दिनों में जिस तरह छोटी-बड़ी सांप्रदायिक घटनाएं हुई, उस पर काबू पाना है। 

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