बापू के विचारों से प्रेरणा ले युवा पीढ़ी : नीतीश

youth-should-folow-gandhi-nitish-kumar
मोतिहारी 18 अप्रैल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों और संदेशों को प्रासंगिक बताया और कहा कि वह बापू के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना चाहते हैं ताकि नई पीढ़ी बापू के विचारों से प्रेरित हो सकें। श्री कुमार ने आज यहां चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के मौके पर चंद्रहिया से मोतिहारी तक आयोजित स्मृति यात्रा (पद यात्रा) में शामिल हुये। यात्रा पूरी होने के मुख्यमंत्री ने चंपारण की धरती से बापू के जुड़ाव की चर्चा करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए वह बापू के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "गांधीजी 15 अप्रैल 1917 को मोतिहारी पधारे थे और यहां आने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि जशौलीपट्टी के किसानों पर जुल्म हो रहा है। बापू ने अगले दिन 16 अप्रैल को जशौलीपट्टी जाने का निर्णय लिया और मोतिहारी से जशौलीपट्टी के लिये चल दिये। रास्ते में चंद्रहिया में उन्हें नोटिस दिया गया कि आपको चम्पारण छोड़ना है। बापू चंद्रहिया से मोतिहारी वापस आये। आज का दिन ऐतिहासिक दिन है इसलिये आज के दिन स्मृति यात्रा का आयोजन किया गया है। "           


श्री कुमार ने कहा, "18 अप्रैल 1917 को गांधी जी की अदालत में पेशी हुई, जहां पर उन्होंने ऐतिहासिक वक्तव्य दिया था। अदालत में ही उन्होंने कहा था कि आपने जो मेरे ऊपर प्रतिबंध लगाया है और वापस जाने को कहा है, मैंने उसका उल्लंघन किया है। ऐसा करने के लिये आपको जो भी सजा देनी है, दे सकते हैं। मैं चम्पारण में किसानों के दुख को देखने आया हूं। यहां जो कुछ भी हो रहा है, उसकी जांच-पड़ताल करनी है। यह मेरी अंतर्रात्मा की आवाज है। हम किसी भी सूरत में यहां से वापस नहीं जा सकते।" मुख्यमंत्री ने कहा कि अंततोगत्वा अदालत ने तीन दिन बाद 21 अप्रैल 1917 की तारीख फैसला सुनाने के लिये निर्धारित किया। इससे पहले ही उस समय के लेफ्टिनेंट गवर्नर की सरकार ने गांधीजी पर जो मुकदमा चलाया जा रहा था, उसे वापस ले लिया। 18 अप्रैल को अदालत में दिया गया गांधीजी का वक्तव्य ऐतिहासिक एवं स्मरणीय है, यही सत्याग्रह की मूल भावना है इसलिये आज के दिन स्मृति यात्रा का आयोजन किया गया है। इसी प्रकार बापू 22 अप्रैल को बेतिया गये थे। राजकुमार शुक्ल जिन्होंने गांधी जी को चम्पारण आने के लिये आमंत्रित किया था। इसकी वजह से अंग्रेजों ने श्री शुक्ल के घर को उजाड़ दिया था। श्री कुमार ने कहा, "बापू का जीवन ही उनका संदेश है। हमें उनके संदेशों को जन-जन तक पहुंचाना चाहते हैं। नई पीढ़ी को बापू के विचारों से अवगत कराना चाहते हैं।  पूरे साल चम्पारण सत्याग्रह के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।" इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने 'चंद्रहिया का महत्व शिलापट्ट' का लोकार्पण किया। इस मौके पर राज्य के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ0 मदन मोहन झा, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह समेत अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे।
Share on Google Plus

About आर्यावर्त डेस्क

एक टिप्पणी भेजें
loading...