त्रिपुरा को फंड उपलब्ध नहीं करा रहा केंद्र : साहा

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अगरतला, 21 मई, त्रिपुरा के वित्त मंत्री भानुलाल साहा ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पर त्रिपुरा को फंड उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार राज्य की कई कल्याणकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदार है और वह राज्य को राजस्व घाटे की ओर ले जा रही है। श्री साहा ने यूनीवार्ता के साथ साक्षात्कार में कहा “14वें वित्त आयोग की सिफारिशों की आड़ में केंद्र सरकार और नवगठित नीति आयोग ने पूर्वोत्तर के सभी राज्यों से विशेष राज्य का दर्जा छीन लिया है जिसके विरोध में इन राज्यों में व्यापक रोष है। केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया था कि फंडिंग का 90:10 पैटर्न बहाल कर दिया जाएगा लेकिन कुछ नहीं हुआ।” उन्होंने कहा कि दूर दराज के एक सीमावर्ती राज्य की मदद करने की बजाय केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व ने एक तरफ तो फंड का आवंटन कम कर दिया है और दूसरी तरफ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मई के पहले सप्ताह में त्रिपुरा आकर झूठे आरोप लगाये कि राज्य सरकार केंद्र द्वारा आवंटित राशि का उपयोग नहीं कर रही है। फंडिंग पैटर्न बदलने से त्रिपुरा को नुकसान होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के असहयोगात्मक रवैये के कारण राज्य में शासन चलाना मुश्किल हो गया है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार 14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का इस्तेमाल करके त्रिपुरा और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के लिए अव्यावहारिक फंड आवंटन फार्मूला लायी है। श्री साहा ने कहा “14वें वित्त आयोग के आवंटन फार्मूले के तहत राज्य को केंद्र से 64215 करोड़ रुपये की जरूरत है लेकिन केंद्र सरकार के अव्यावहारिक फैसले के आधार पर केवल 31309 करोड़ रुपये का आवंटन करने का निर्णय लिया है। यह मांग का महज 58 फीसदी है। क्या यह उचित है?” वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निजी पत्र लिखकर आर्थिक संकट से उबारने में हस्तक्षेप करने की गुहार लगायी थी। उन्होंने कहा “हमने प्रधानमंत्री से 18000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त विशेष अनुदान मांगा था। हमें वेतन आयोग के द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी वेतनमान वाले अधिकारियों के बकाये चुकाने तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं को पूरा करने के लिए इस रकम की जरूरत थी लेकिन केंद्र सरकार राज्य की मदद की इच्छुक नहीं है।” उल्लेखनीय है कि श्री साहा 19 मई को श्रीनगर में हुई जीएसटी परिषद की बैठक में भी शामिल नहीं हुए। केंद्र सरकार हालांकि अपना पक्ष रखते हुए कई बार कह चुकी है कि कार्य प्रणाली और सहायता के तरीकों में परिवर्तन के कारण पूर्वोत्तर के राज्यों के फंडिंग पैटर्न में बदलाव आया है। यहां तक कि वित्त मंत्री अरुण जेटली संसद में कह चुके हैं कि 14वें वित्त आयोग के तहत पर्वतीय राज्यों और पूर्वोत्तर के राज्यों को एक विशेष दर्जे के तहत रखा गया है जिनके साथ विशेष तौर का बर्ताव किया जाएगा। श्री जेटली ने यह दावा भी किया कि इन राज्यों को पहले के 32 प्रतिशत की तुलना में अधिक राशि आवंटित की गयी है हालांकि श्री साहा ने इस दलील को कोरी बयानबाजी करार दिया है।

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