विलुप्त होने की कगार पर पहुंचे स्कीमर से आबाद है चंबल

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इटावा 26 मई, विलुप्त होने की कगार पर पहुंचे खूबसूरत और आकर्षक पक्षी ‘इंडियन स्कीमर’ से चंबल क्षेत्र गुलजार है। चंबल नदी के शुद्ध जल और नेस्टिंग के लिए टापू की उपलब्धता की वजह से इस पक्षी का यहां आना जाना आम बात है। यही नहीं, इनकी बढती संख्या से चंबल का सेंचुरी भी गुलजार है। देश में अपनी कुल संख्या का लगभग 80 फीसदी राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी में प्रवास करता है। तीन राज्यो में फैली राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी में दुर्लभ घडियाल, मगरमच्छ और कछुओ समेत अन्य जलीय जीवों के लिए संरक्षित है लेकिन यहां मनमाफिक वातावरण मिलने से ‘इंडियन स्कीमर’ अपना बसेरा बनाये हुए है। विश्व में इनकी संख्या 10 हजार से कम है जिसमें अधिकाधिक यहां के रमणीय वातावरण में अपनी उपस्थिति बनाये हुए है और इनकी संख्या में बढोत्तरी एक शुभ संकेत है। चंबल अभ्यारण्य के शोध अधिकारी डा. ऋषिकेश शर्मा के मुताबिक भारत ही नहीं अब दुनिया में इंडियन स्कीमर की सर्वाधिक संख्या चंबल नदी में बची है । उन्होंने इंडियन स्किमर के कुनबे में इस साल और बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई । वर्ष 1994 में की गई पक्षी गणना के दौरान चंबल में इन पक्षियों की संख्या 3555 थी लेकिन इसके बाद एकाएक इनकी संख्या घटती चली गई । साल 2003 में इनकी संख्या घटकर 2332 रह गई और 2011 में घटकर मात्र 1524 रह गई, लेकिन चालू वर्ष में 1839 पक्षी दिखाई देने से वन विभाग को उम्मीद है कि इंडियन स्कीमर का यह आंकड़ा जल्दी ही फिर से 1994 की संख्या के आसपास तक पहुंच जाएगा। चंबल सेंचुरी के वन्य जीव प्रतिपालक सुरेश चंद्र राजपूत ने आज यहाँ बताया कि आइसलैंड पर घोसला बनाने वाले इस पक्षी को स्थानीय भाषा मे ‘पंजीरा’ कहते हैं क्योंकि उडते समय यह पानी को चीरता हुआ कुछ बूंदे चोंच मे लेकर उड जाता है। उन्होंने बताया कि इंडियन स्कीमर पक्षी हिमालय रिवर सिस्टम में पाया जाता है। इन्हें ठंडा और साफ पानी पसंद होता है। 


कुछ साल पहले जब हिमालय रिवर सिस्टम में तापमान काफी कम हो गया था, उस समय कुछ दिन बिताने के लिए इंडियन स्कीमर का एक झुंड चंबल आया था। उसके बाद से हर साल सर्दियों में इन पक्षियों ने यहां आना शुरू कर दिया और कुछ तो यहां रहना भी शुरू कर दिया। श्री राजपूत ने बताया कि वर्तमान समय में चंबल के पर्थरा मे 35 घोंसले, पिपरौली गढिया मे 17 ,खेडा अजब सिंह मे पांच ,कमौनी मे 32,सांगरी मे नौ और पाली मे 11 घोसले पाये गये हैं। कसौआ के सामने मध्यप्रदेश की तरफ इनके कुछ घोसले खराब हो गये है। यह पक्षी एक बार में दो से चार अण्डे देती है। उन्होंने बताया कि पानी की कमी के कारण चंबल मे मोटर वोट आदि का संचालन नहीं हो पा रहा है जिस कारण इन पक्षियों का पता लगाने में कठिनाई हो रही है । चंबल एक ऐसी नदी है जिसे सेंचुरी के तौर पर संरक्षित किया गया है। चंबल मे लगातार घटते पानी को लेकर इस साल जनवरी और मार्च मे मध्यप्रदेश के देवरी मे उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान के अधिकारियों के बीच संगोष्ठी हो चुकी है जिसमे एकमत होकर कोटा से चंबल नदी मे अधिक से अधिक पानी की उपलब्धता कराने पर जोर दिया गया था। चंबल में अन्य प्रजातियों के पक्षी भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। चंबल में 198 प्रकार के प्रजातियों के पक्षियों की पहचान हुई है, जिसमें इंडियन स्कीमर विलुप्त प्राय पक्षी है। यह पक्षी धीरे धीरे विलुप्त होता जा रहा है, लेकिन चंबल नदी इसके लिए सुखद प्रवास बना हुआ है। पक्षी प्रेमियों का कहना है कि दुनिया में इस पक्षी की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसमें इंडियन स्कीमर, अफ्रीकन स्कीमर और ब्लैक स्कीमर है। 

पर्यावरणविद डा. राजीव चौहन का कहना है कि विश्व स्तर पर संकटग्रस्त पक्षी की श्रेणी में शामिल पंजीरा चंबल में वैसे तो राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा में यह बहुतायत में पाए जाते हैं, लेकिन इटावा के पर्थरा, खेडा अजब सिंह, कसौआ, पिपरौली गढिया मे इनकी संख्या 200 से 300 के बीच देखी जाती रही है । इंडियन स्कीमर उत्तरी भारत की बड़ी नदियों सिंधू , गंगा, ब्रह्मपुत्र नदियों से दक्षिण में कृष्णा नदी तक, नेपाल की तराई, बांग्लादेश और पाकिस्तान में पाये जाते हैं। राजस्थान में चंबल नदी खासकर धौलपुर करौली जिले में भी इसको देखा जाता है। चंबल नदी के शुद्ध जल के साथ ही उथले टापू और नेस्टिंग की जगहों की उपलब्धता के कारण चंबल पक्षियों का पसंदीदा स्थल बना है। हर साल यहां बडी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। डा0 राजीव का कहना है कि चंबल में यह पक्षी नवम्बर और दिसंबर में आते हैं । फरवरी तक इनकी प्रणय लीला देखने को मिलती हैं । फरवरी से लेकर अप्रैल तक इनका प्रजननकाल रहता है। चौदह से 21 दिन में अंडों से बच्चे निकलना शुरू हो जाते और मई-जून तक ये बच्चों को उड़ने लायक तैयार कर जुलाई के प्रथम सप्ताह में बच्चों को लेकर उड जाते हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर(आईयूसीएन) द्वारा (विलुप्त प्रजाति में रखी गई स्किमर परिवार के पक्षी इंडियन स्किमर का सबसे बड़ा कुनबा अब चंबल नदी में है । हाल ही में हुई पक्षियों की गणना के बाद जो आंकड़े आये हैं, उसके मुताबिक देश में गंगा, यमुना, घाघरा और सोन नदियों में जहां इस पक्षी की संख्या घटी है, वहीं चंबल में संख्या बढ़ी है । विशेषज्ञों के मुताबिक यह पक्षी उत्तर भारत से माइग्रेट हुआ है और इसने अब चंबल नदी को अपना सबसे बड़ा घरौंदा बनाया है।

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