जीएसटी से निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन : आरबीआई

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नयी दिल्ली 14 मई, रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 01 जुलाई से लागू होने वाले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से निवेश को प्रोत्साहन मिलने और वित्तीय सुदृढ़ीकरण जैसे फायदे गिनाते हुए अगले एक से डेढ़ साल के लिए खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट “स्टेट फाइनेंसेज : अ स्टडी ऑफ बजट्स ऑफ 2016-17” में कहा गया है, “भारत के मौजूदा कर ढाँचे में पूँजीगत वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क और वैट (मूल्य वर्द्धित कर) लागू होने से निवेश हतोत्साहित होता है क्योंकि इनके लिए कोई लागत कर छूट नहीं मिलती। ” रिपोर्ट में कहा गया है कि गैर-विनिर्माण क्षेत्र को पूँजीगत उपकरण की खरीद पर उत्पाद शुल्क के लिए लागत छूट नहीं मिलती। इसी प्रकार सेवा क्षेत्र के लिए खरीदी गयी पूँजीगत वस्तु पर राज्यों के वैट में कोई लागत कर छूट नहीं मिलती। आरबीआई ने सुब्रमणियम् समिति की वर्ष 2015 की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जीएसटी से निवेश में दो प्रतिशत तक की बढोतरी हो सकती है जिससे देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 0.5 प्रतिशत का इजाफा होगा। हालाँकि, अन्य अध्ययनों में जीएसटी लागू होने के बाद जीडीपी में 1.7 प्रतिशत तथा 3.1 से 4.2 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी की बात भी कही गयी है। केंद्रीय बैंक के अध्ययन के अनुसार, जीएसटी लागू होने से अनुपालना (कंप्लायंस) लागत में कमी आयेगी, कर पर कर लगाने से बचा जा सकेगा और कर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी। यह देखते हुये कि भारत में सेवा क्षेत्र काफी सशक्त है, इससे आने वाले समय में बड़ा परिवर्तन होगा। जीएसटी से कर राजस्व बढ़ेगा तथा प्रशासनिक अनुपालना लागत में कमी आयेगी इसलिए जीएसटी लागू होने के बाद पूँजीगत निवेश में कटौती किये बिना वित्तीय सुदृढ़ीकरण होगा। महँगाई पर जीएसटी के प्रभाव के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी लागू होने के बाद एक से डेढ़ साल तक महँगाई बढ़ सकती है। हालाँकि, आपूर्ति श्रृंखला सहज होने तथा परिवहन एवं उत्पादन लागत घटने से धीरे-धीरे महँगाई में कमी आयेगी। आरबीआई ने कहा है कि जीएसटी से छोटे तथा मध्यम उद्योगों को भी लाभ होगा। इससे उनके लिए कारोबार करना आसान हो जायेगा, लॉजिस्टिक लागत कम होगी, राज्यों की सीमाओं के बाहर भी उनकी पहुँच बनेगी और बिक्री एवं सेवाओं में कारोबार करने में उन्हें सहूलियत होगी।

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