जाधव के मामले पर अंतर्राष्ट्रीय अदालत में जाने का निर्णय सोचा समझा -भारत

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नयी दिल्ली 10 मई, भारत ने आज कहा कि जासूसी के आरोपों में पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा मौत की सजा पाये भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की जान बचाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला बहुत सोचविचार कर सावधानी पूर्वक लिया गया है। विएना की राजधानी हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक अदालत में भारत ने आठ मई को एक याचिका दायर करके श्री जाधव के मामले में पाकिस्तान पर कैदियों को राजनयिक संपर्क संबंधी विएना संधि के उल्लंघन करने की शिकायत करके मृत्युदंड पर रोक लगाने की अपील की थी जिस पर नौ मई को अदालत ने स्थगनादेश जारी किया। अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने भारत की याचिका स्वीकार करते हुए पाकिस्तान सरकार ने मामले का फैसला आने तक सज़ा पर रोक लगाने को कहा है। भारत सरकार की ओर से जाने माने वकील हरीश साल्वे ने अदालत में पैरवी की। अगली सुनवाई 15 मई से शुरु होगी। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने यहां नियमित ब्रीफिंग में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत के माध्यम से आगे बढ़ने का निर्णय एक भारतीय नागरिक की जान बचाने के लिये बहुत सोच विचार करके सावधानी पूर्वक लिया गया है जो पाकिस्तान की अवैध हिरासत में है और उनका जीवन खतरे में है। श्री बागले से पूछा गया था कि भारत ने एक द्विपक्षीय मसले काे अंतर्राष्ट्रीय अदालत में ले जाने का फैसला किस प्रकार से किया। गौरतलब है कि भारत ने इससे पहले 1971 में अंतर्राष्ट्रीय अदालत में पाकिस्तानी इंटरनेशनल एयरलाइन्स के भारतीय वायु क्षेत्र में उड़ान भरने को लेकर पाकिस्तान की शिकायत पर अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन की शक्तियों पर सवाल उठाया था। श्री बागले ने यहां कहा कि भारत ने अपनी याचिका में कहा है कि श्री जाधव की मौत की सजा के अमल पर तुरंत रोक लगायी जाये। उन्हें जिस प्रकार से सजा सुनाई गयी है और उनकी गिरफ्तारी से लेकर मुकदमे की पूरी प्रक्रिया में विएना संधि का उल्लंघन किया गया है और यह मूलभूत मानवाधिकारों के विपरीत है। याचिका में यह भी मांग की गयी है कि अगर पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय अदालत में श्री जाधव को दोषी सिद्ध नहीं कर पाता है तो पाकिस्तानी सैन्य अदालत के फैसले को गैर कानूनी घोषित किया जाये। श्री बागले ने अंतर्राष्ट्रीय अदालत में जाने की परिस्थितियों पर चर्चा करते कहा कि भारत ने 16 बार पाकिस्तान से श्री जाधव से राजनयिक संपर्क की इजाज़त मांगी लेकिन पाकिस्तान ने कोई तवज्जो नहीं दी। पाकिस्तान से उनके विरुद्ध चलाये गये मुकदमे के कागज़ात तक नहीं दिये। श्री जाधव की मां ने भी एक याचिका पाकिस्तान सरकार को सौंपी है, उसका भी कुछ पता नहीं है। श्री जाधव की मां ने पाकिस्तान जाकर उनके खिलाफ फैसले को चुनौती देने के लिये वीसा का आवेदन किया है, उस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। श्री जाधव की मां को पाकिस्तानी वीसा के मामले को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी 27 अप्रैल को पाकिस्तानी विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज को एक पत्र भी लिखा है जिसका कोई उत्तर नहीं मिला है। इसलिये इन सब बातों से उनकी जान की चिंता बढ़ गयी थी। 

पाकिस्तान में भारतीय युवती उज़्मा के बारे में एक सवाल पर प्रवक्ता ने कहा कि भारत एवं पाकिस्तान की सरकार मिल कर उसे भारत वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है कि वह जल्द ही स्वदेश लौटेगी। पाकिस्तान से भारत में उपचार के लिये आने वाले मरीज़ों को भारत द्वारा मेडिकल वीसा देने पर रोक लगाये के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तानी मरीज़ों की वास्तविकता को निर्धारित करने के लिये विदेश मंत्रालय या पाकिस्तानी सरकार का आैपचारिक अनुमोदन अनिवार्य किया गया है। पाकिस्तानी सरकार के औपचारिक अनुमोदन मिलने पर तुरंत ही वीसा ही दिया जायेगा।   

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