बिहार : और चिकित्सक नहीं जाते हैं महादलितों के द्वार

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पटना। दलित को महादलित बनाने में सीएम नीतीश कुमार की भूमिका अग्रहणी है। राज्य महादलित आयोग निर्माण किया। आयोग का प्रथम चेयरमैन विश्वनाथ ऋषि बनें। इनके कार्यकाल 5 वर्ष के बाद खत्म हुआ।निवर्तमान विश्वनाथ ऋषि के कार्यकाल को सरकार ने विस्तार नहीं दिया। इनके जाने के बाद आयोग के द्वितीय चेयरमैन उदय मांझी बने। भाजपा में उदय मांझी को चले जाने के बाद तृतीय चेयरमैन डा. हुल्लास मांझी बने। इनका भी कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व ही तमाम आयोग,कमिटी,निगम आदि को सरकार ने भंग कर रखा है। इसके कारण आयोग के प्रथम चेयरमैन विश्वनाथ ऋषि द्वारा सरकार को प्रेषित अनुशंसाओं को क्रियान्वित करने वाले कोई बचा ही नहीं। जिसके कारण सीएम मनमौजी बन बैठे हैं। महादलितों को समाज के मुख्यधारा में पहुंचाने का सपना तार-तार हो गया। जहां पर महादलित थे अब तो रसातल में चले गये हैं। यह जरूर था कि राज्य महादलित आयोग गठित करते वक्त सीएम ने लम्बे चैड़े वादा किये थे। सीएम का वादा अन्य नेताओं की तरह रह गया। धरती पर उतरा ही नहीं। चिकित्सक नहीं जाते हैं महादलितों के द्वार। इसके कारण महादलित स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम हो जा रहे हैं। 


 दीघा थानान्तर्गत रामजीचक, बाटा (नाच बगीचा) में रहती हैं विधवा सुगिया देवीः सुगिया देवी की मां का घर है नाच बगीचा। बाईपास के आसपास कनौजी, कच्छुआरा और खेमनी चक मुसहरी है। खेमनी चक में बिन्देश्वरी मांझी उर्फ छोटे मांझी का घर है। खेतिहर मजदूर थे। छोटे मांझी और सुगिया देवी के सहयोग से 4 बच्चे हुए। सीमा कुमारी, सन्नी कुमार,सोनू कुमार और जूली कुमारी। सबसे बड़ी बेटी सीमा कुमारी बीमार हैं। किसी तरह से पांचवी क्लास तक पढ़ सकी हैं 17 साल की सीमा कुमारी। उसे क्लास में ही बेहोश का दौड़ा पड़ता था। इसके कारण परिजन स्कूल जाने पर प्रतिबंध लगा दिये। इस बीच छोटे मांझी की मौत हो गयी। सुगिया देवी 3 साल से विधवा है। उसे सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलता है। अब खेतिहर मजदूरी करती हैं विधवा सुगिया देवी। सीमा को लेकर सुगिया परेशानः बेसमय चक्कर, उल्टी,बेहोशी आदि के बाहरी लक्षण से चिकित्सकों ने मिर्गी करार दिया। किसी के बताने पर सुगिया देवी बेटी सीमा कुमारी को लेकर चिकित्सक को दिखलाने चल पड़ती। काफी रकम बर्बाद कर दी हैं। अब किसी ने कोईलवर,भोजपुर में स्थित बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य एवं सहबद्ध विज्ञान संस्थान,बिगहारा जाने को कह दिया। यहां 12 जनवरी 2017 को दिखाने ले गये। दो बार दवा लाकर खायी हैं सीमा कुमारी। सीमा कहती हैं कि दवा खाने से असर बेहतर दिख रहा है। बेहोशी दौड़ा आने का समय निर्धारित नहीं है। दो माह, डेढ़ माह के बाद भी तो कभी 1 सप्ताह में ही बीमार पड़ जाते हैं। चक्कर, उल्टी,बेहोशी का अनुमान होने पर सो जाती हूं। कुछ समय के बाद सामान्य हो जाती हूं। हलकान मां सुगिया देवी कहती हैं कि बीमारी के कारण ही सीमा कुमारी की शादी नहीं कर पा रही हूं। विधवा सुगिया देवी कहती हैं कि मानसिक रोग के लक्षण के आलोक में बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य एवं सहबद्ध विज्ञान संस्थान,बिगहारा ने दवा देना शुरू किया है। यह मानसिक रोग के लक्षण है।

उदासी अनिद्रा,दुविधा,घबराहट,बेचैनी
काम करने में मन नहीं लगना
बेवजह भय या शंका से ग्रसित होना
जीवन बेकार एवं दुनिया खराब लगना
बिना वजह बहुत खुश होना, अधिक खर्च करना
अधिक बोलना, भ्रामक एवं बड़ी-बड़ी बातें करना
अत्यधिक गुस्सा,आक्रोश या आक्रामकता
एक ही काम को बार-बार करना जैसे हाथ धोना
याद्दास्त की कमी, कार्यक्षमता का हृास
बेहोश होना, बेहोशी का  दौड़ा पड़ना
एकान्तवासी एवं आत्महत्या की प्रवृति 
अपने आप बुदबुदाना, हंसना या रोना
काल्पनिक आवाजों या दृश्यों का अनुभव होना
नशाखोरी एवं उससे जनित लक्षण

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