अक्टूबर तक पूरा होगा ‘मिशन क्लीन’: विनोद राय

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नयी दिल्ली, 11 मई, सर्वाेच्च अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) के अध्यक्ष विनोद राय ने भरोसा जताया है कि अक्टूबर तक राज्य क्रिकेट संघों में लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करने के साथ ही उनका बीसीसीआई में ‘मिशन क्लीन’ संपन्न हो जाएगा। चार सदस्यीय सीओए का नेतृत्व कर रहे पूर्व सीएजी राय ने दोहराया है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में उनकी भूमिका दीर्घकालिक नहीं है और समिति को भरोसा है कि अक्टूबर तक सभी राज्य क्रिकेट संघों में लोढा समिति की सिफारिशें लागू होने के साथ उनका काम भी पूरा हो जाएगा। सीओए के कामकाज संभालने के 100 दिन पूरे होने के बाद राय ने क्रिकइंफो से कहा“ यह अभी भी लंबा समय है लेकिन उम्मीद है कि अक्टूबर तक इसका अंत हो जाएगा। हमें इस बात का पूरा भरोसा है क्योंकि हमें पता है कि बीसीसीआई में सीओए का कार्यकाल बहुत लंबा नहीं है। हम बोर्ड को एक नया ढांचा मुहैया कराना चाहते हैं। यह अभी तक व्यक्तिगत ढर्रे पर चल रहा है लेकिन हम इसमें एक सही ढांचागत व्यवस्था चाहते हैं।” सर्वाेच्च अदालत ने राय के नेतृत्व में मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा, पूर्व भारतीय महिला कप्तान डाएना इडुलजी और आईडीएफसी के महाप्रबंधक विक्रम लिमये को प्रशासकों की समिति(सीओए) का सदस्य बनाया था जिसे बीसीसीआई की नयी ढांचागत व्यवस्था और नयेे पदाधिकारी चुने जाने तक संचालन का काम सौंपा गया था। इस समिति को 30 जनवरी को नियुक्त किया गया था जिसने एक फरवरी से कामकाज शुरू कर दिया था।


सर्वाेच्च अदालत ने वर्ष के शुरूआत में ही बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को लोढा समिति की सिफारिशों को लागू नहीं करने के कारण उनके पदों से हटा दिया था। इसके बाद शीर्ष अदालत ने सीओए की नियुक्ति कर नये पदाधिकारी चुने जाने तक उन्हें बोर्ड का कामकाज संभालने तथा सिफारिशों को लागू करवाने तक बीसीसीआई के संचालन की जिम्मेदारी दी थी। राय ने कहा कि सीओए ने शुरूआती कुछ महीने तो समिति के अधिकार, आईपीएल के संगठन, आईसीसी की बोर्ड बैठकों से जुड़े मुद्दे समझने में ही लगाये जबकि हाल में ही उन्होंने लोढा समिति की सिफारिशों के संबंध में राज्य संघों से मुलाकात की है। राज्य संघों को अभी भी सिफारिशों को लेकर कुछ दिक्कतें हैं जिनमें एक राज्य एक मत और प्रशासकों के लिये 70 वर्ष की आयु निर्धारित करना प्रमुख हैं। उन्होंने कहा“ सभी संघों के अपने अपने अलग विचार हैं और उन्होंने सिफारिशों के खिलाफ केस दायर किये हुये हैं। हमने उन्हें कहा है कि एक दिन अदालत इन सभी विरोधों को बाहर फेंक देगी। आप एजीएम नहीं चाहते, ठीक है तो नये संविधान को लागू करें, लेकिन ये यहां भी अड़ गये हैं। हम अदालत को बता देगें कि 20 में से 18 सिफारिशों को लागू किया गया है और यह अदालत पर है कि वह क्या निर्णय करे।” उन्होंने कहा“ मैंने पहली बार छह मई को राज्य संघों के साथ बैठक की थी और तब हमने उन्हें कहा था कि इस मामले पर बात करने की जरूरत है। वे इसे लेकर सकारात्मक हैं लेकिन उनकी सोच एक दायरे तक सिमटी हुई है। वे यह नहीं जानते कि आईसीसी का प्रशासनिक और वित्तीय मॉडल है और वित्तीय मॉडल में जहां तक हमारा संबंध है हम पुरानी स्थिति में अब नहीं हैं।” राय ने कहा“ हमने बीसीसीआई सदस्यों को कहा था कि यदि वे आईसीसी के संचालन मॉडल के आधार पर उसका बहिष्कार करना चाहते हैं तो हम उसका साथ देंगे लेकिन यदि वित्तीय मॉडल को लेकर वह ऐसा करेंगे तो हम भारतीय क्रिकेट को नुकसान नहीं होने देंगे।” 

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