मधुबनी : उत्तर बिहार से मीटर गेज ट्रेन की हुयी विदाई ,आज से बडी लाईन का काम शुरू ।

  • सकरी निर्मली लाईन 131 साल पहले हुयी थी परिचालन। 

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मधूबनी/अंधराठाढ़ी।(मोo आलम अंसारी) झंझारपुर लौकहा लाईन को 17 फरवरी 1976में तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र ने हरी झंडी देकर किया था उदघाटन। मीटर गेज टेन शुक्रवार की आधी रात से परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया । 26 मई 2017 अब इतिहास में अस्मरणीय तिथि बन गया है। इस लाईन के यात्रियो का आखरी रेल यात्रा का हिस्सा बना 5521 अप और 5522 डाउन सवारी गाडी रहा । शुक्रवार को डीआरएम आरके जेन ने सकरी जक्सन पहुचकर मीटर गेज की टेन को इंजन पर सवार होकर बिदाई दी । मालूम हो कि 1886 ई में दरभंगा से सकरी झंझारपुर निर्मली होते हुये कोशी नदी के कनवा घाट तक छोटी लाईन का परिचालन शुरू हुआ था। यह रेल मार्ग अत्यन्त ही महत्वपूर्ण था। गोरखपुर से जगबोनी तक का सफर होता था। कोशी के विना कारी लीला के वाद रेलवे टेक क्षत विक्ष हो गया । तव से इसका परिचालन निर्मली तक हीं सिमित हो गया । मिथिलांचल कोशी नदी के धारा वदलने से दो हिस्से मे वट गया । तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र ने र्वा 1974 में झंझारपुर लौकहा रेल खंड का शिलान्यास किया था। र्वा 1976 में हरी झंडी दिखा पहली वार लोकहा झंझारपुर रेल खंड पर टेन का परिचालन शुरू किया लौकहा रेलखंड में मीटर गेज लाईन अब इतिहास हो गया। इसकी आयु मात्र 41 वर्षो की रही। बड़ी लाईन में तब्दील करने के लिए गुरुवार की रात से रेलवे प्रशासन ने मेगा ब्लाक कर दिया है। अतीत बन चुके इस छोटी लाईन के साथ कुछ खट्टी-मिट्ठी अनुभव हैं। वरहाल इसका सफरनामा अमूमन निरापद ही रहा। वर्ष 1974 के पहले यह परोपट्टा रेल विहीन था। दरभंगा जयनगर निर्मली के साथ-साथ लंबी रेल यात्रा के लिए लोगों को झांझरपुर राजनगर सकरी जाना पड़ता था। आजादी के बाद से ही इस परोपट्टा में रेल लाईन की मांग होने लगी थी। इस रेलखंड में लौकहा खुटौना बरहरा हाल्ट , वाचस्पतिनगर ,चंदेश्वर स्थान,महरैल, झंझारपुर बाजार हाल्ट  और झंझारपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन है। ब्लाक लेने तक इस रेल खंड में चार जोड़ी गाड़ियां आती-जाती थी। वर्ष 1987 की भयंकर बाढ़ में यह रेल खंड क्षत विक्षत हो गया था। घाटे का लाईन  विभाग इसको बंद करने पर अमादा था। तत्कालीन लोकसभा सदस्य डॉo गौरी शंकर राजहंस ने तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व0 राजीव गांधी से कहकर चालू करवाया था।एकाध छोटी-मोटी दुर्घटनाओ को छौड़कर इस छोटी लाईन का 41 वर्षीय सफरनामा अमूमन दो निरापद रहा। मात्र दो बार गाड़ियां वे पटरी हुई और एक बार ट्रैक्टर वस से गाड़ियां रगड़ खायीं थी। लोगों को भी चोटे लगी थी ।इस रेल खंड को बौड गेज लाईन में तब्दील करने की मांग पुरानी थी ।पूर्व सांसद देवेन्द्र प्रसाद यादव ने इसके लिए बड़ी-बड़ी सभाये की थी। कई संगठनो ने निर्मली जाने के क्रम में तत्कालीन रेलमंत्री नितीश कुमार से मिलकर ज्ञापन भी दिया था। मेगाब्लाक की अवधि भले लम्बी हों किन्तु लोग खुश है ।उनमे रेलवे सहूलियत बढ़ने की आस लगी है। चालू होने पर अपने निकट स्थान स्टेशन से ही लम्बी रेल यात्रा संभव हो जायेगी ।रेल और सड़क से होने वाले विकास का स्वाद वे 1976 से ही चख रहे है। मेगाब्लॉक तक स्टेशन और हाल्ट के चाय नास्ता पान आदि के दुकानदारो के कारोवार प्रभावित होंगें ।वे वेरोजगार हो जायेगे। कोर्ट कहचरी और रोज झंझारपुर आने-जाने वालो का खर्चा बद जायेगा। इसके उलट वस टेम्पू वालो के पौ वारह होंगे। बाबजूद इससे वे लोग प्रसन है।



अमान परिवर्तन का लक्ष्य निर्धरित-
 सकरी से झंझारपुर के बीच 20 किलो मीटर लम्बे रेल खंड पर अमान परिर्वन कार कार्य मार्च 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य है। निर्मली से सरायगढ 22 किमी लम्बे रेल खंड का बीजी कन्वर्जन फरवरी 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारण किया गया । वहीं लोकहा झंझारपुर रेल खंड कोई लक्ष्य निर्धारण नहीं किया गया है। रेलवे वोड्र ने सकरी लौकहा वाजार निर्मली सहरसा फारविसगंज रेल परियोजना के तहत इन खंडो को 206.6 किमी लम्बे रेलपरियोजना के लिये अमूमन 355.81 कडोर की खर्च निर्धारण किया है। इसके लिये मैजूदा वित्तीय र्वा के रेल बजट में 125 करोड का प्रावधान किया है।
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