अगले साल से भारत का कोई गांव बिजली के बिना नहीं रहेगा : मोदी

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गांधीनगर, 23 मई, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज लगभग 80 सदस्य देशों वाले अफ्रीकी विकास बैंक समूह के निदेशक मंडल की वार्षिक बैठक का औपचारिक उद्घाटन करते हुए भारत को नया भारत बनाने के लिए उनकी सरकार के प्रयासों और योजनाओं को साझा किया और कहा कि ऐसे ही प्रयासो तथा आधारभूत संरचना, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में अभूतपूर्व निवेश के चलते अगले साल तक देश में एक भी ऐसा गांव नहीं होगा जहां बिजली की पहुंच न हो। चार वर्तमान अथवा पूर्व अफ्रीकी राष्ट्रप्रमुखों तथा 80 देशों के करीब 3000 प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यहां महात्मा मंदिर में कल से शुरू हुई इस बैठक का आज औपचारिक उद्घाटन करते हुए श्री माेदी ने अफ्रीका और भारत तथा गुजरात के सदियों पुराने संबंधों का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इससे दोनो संस्कृतियां परस्पर समृद्ध हुई हैं। स्वाहिली भाषा में कई शब्द हिन्दी के ही है। उन्होंने अफ्रीकी देशों के आजादी के आंदोलन में भारतीयों की भूमिका की भी चर्चा की तथा यह भी कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने अहिंसक आंदोलन के हथियार को दक्षिण अफ्रीका में ही धार दिया था। उन्होंने कहा कि दोनो क्षेत्रों में सबंध और मजबूत ही हुए हैं और भारत को इस पर गर्व है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से उन्होंने अफ्रीका को शीर्ष वरीयता दी है। उन्होंने तथा अन्य भारतीय मंत्रियों, राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति ने अफ्रीकी देशों का व्यापक दौरा किया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनो क्षेत्रों में गहरा रिश्ता है तथा 13 राष्ट्राध्यक्षों समेत अन्य गणमान्य अफ्रीकी लोगों ने भारतीय संस्थानों में शिक्षा हासिल की है। दोनो देशाें के बीच द्विपक्षीय व्यापार भी बढा है। भारत और जापान ने मिल कर भी अफ्रीका के विकास के लिए योजना बनायी है। भारत के निजी क्षेत्र ने भी गुजरात में पिछले 20 साल में 54 अरब डालर का निवेश किया है। भारत वहां सबसे बडे पांच निवेशकों में है। भारत कृषि के क्षेत्र में समृद्धि पैदा करने के मामले में अफ्रीकी विकास बैंक से सीखना चाहता है जिसका इस्तेमाल वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगनी करने की योजना के लिए संसाधन, बाजार उपलब्धता अादि के लिए किया जा सके। दोनो क्षेत्रों में एक जैसी चुनौतियां है। हमे मुद्रास्फीति जैसे बडे आर्थिक संकेतकों को नियंत्रित रखते हुए सीमित संसाधनों के साथ गरीबी उन्नमूलन तथा आधारभूत संरचना के विकास आदि के काम करने है। भारत ने कम नकदी वाली व्यवस्था की पहल के मामले मे केन्या की सफल मोबाइल बैंकिंग प्रणाली से सीखा है। उन्होने कहा कि उनकी सरकार के तीन साल के दौरान वित्तीय घाटा, भुगतान संतुलन घाटा, मुद्रास्फीति नीचे गयी है जबकि सकल घरेलू उत्पाद, विदेशी मुद्रा भंडार और पूंजी निवेश बढा है। ये अर्थव्यवस्था के मोटे सूचक हैं। श्री मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सरकारी सहायता को सीधे बैंक खाते में डालने और इस संदर्भ में रसोई गैस सब्सिडी के जरिये की गयी चार अरब डॉलर की बचत का जिक्र भी किया। उन्होंने यूरिया पर नीम की परत चढाने की सफल योजना, मिट्टी की सेहत की जानकारी वाले स्वाइल हेल्थ कार्ड योजना आदि की भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, स्मार्ट सिटी योजना, सबके लिए आवास योजना, डिजीटल इंडिया आदि के जरिये आने वाले समय में भारत को दुनिया का विकास इंजन बनाया जाएगा हालांकि इसके साथ ही इसे जलवायु के अनुकूल विकास का एक नमूना भी बनाया जाएगा। पिछले कुछ समय में आधारभूत संरचना और अन्य क्षेत्रों में अभूतपूर्व निवेश हुआ है। इसके परिणामस्वरूप अगले साल से भारत मे एक भी गांव बिजली के बिना नहीं रह जाएगा। उन्होंने देश के आर्थिक विकास को गति देने में दो महत्वपूर्ण कारक सार्वत्रिक बैंकिंग और इसके जरिये जन धन जैसी योजना और आधार कार्ड को बताया। श्री मोदी ने कहा कि खेल में भारत अफ्रीकी देशों के धावकों का लंबी दूरी के दौड में तो मुकाबला नहीं कर सकता पर वह बेहतर भविष्य के लिए लंबे और कठिन दौड में उसके साथ ही रहेगा। 

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