जाधव मामले में पाकिस्तान ने किया विएना संधि का उल्लंघन

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हेग/नयी दिल्ली 15 मई, भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए आज कहा कि पाकिस्तान ने विएना संधि के अनुच्छेद 36 का उल्लंघन किया है और मार्च 2016 से लेकर अब तक श्री जाधव से राजनयिक संपर्क के अनुरोधों को नहीं माना है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में श्री जाधव को पाकिस्तान सैन्य अदालत द्वारा मौत की सज़ा सुनाये जाने के खिलाफ भारत की याचिका पर आज से सुनवाई शुरू हो गयी। यहां स्थित पीस पैलेस के ग्रेट हॉल ऑफ जस्टिस में हो रही इस कार्यवाही में भारत के अधिवक्ता दल का नेतृत्व डॉ दीपक मित्तल कर रहे हैं। जाने-माने अधिवक्ता हरीश साल्वे ने विस्तार से भारत का पक्ष रखते हुए कहा श्री जाधव के मामले में विएना संधि में राजनयिक संपर्क के प्रावधान वाले अनुच्छेद 36 का उल्लंघन किया गया है। श्री साल्वे ने कहा कि श्री जाधव को कथित रूप से तीन मार्च 2016 को पकड़ा गया था लेकिन भारत को इसकी कोई सूचना नहीं दी गयी। भारत को 25 मार्च 2016 को यह समाचार सार्वजनिक रूप से मिला। भारत ने अनेक बार राजनयिक संपर्क का अनुरोध किया लेकिन उसे बार-बार ठुकरा दिया गया। भारत को दस अप्रैल 2017 को पता चला कि श्री जाधव को जासूसी के आरोप में सैन्य अदालत ने मौत की सज़ा सुनायी है। भारत ने इस फैसले की प्रति और कार्यवाही का ब्यौरा मांगा लेकिन वह भी उपलब्ध नहीं कराया गया। श्री जाधव की मां ने 26 अप्रैल को तीन माध्यमों से पाकिस्तान को अपील भेजी है लेकिन उसका भी कुछ नहीं पता चला। उन्होंने कहा कि स्थिति बहुत गंभीर है। इसलिये भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। श्री साल्वे ने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा सुनाया जाना विएना संधि के अनुच्छेद 36 के तहत अधिकारों के उल्लंघन है। श्री जाधव को बिना राजनयिक संपर्क का मौका दिए गिरफ्तार कर रखा गया है और अब उन पर फांसी की तलवार लटक रही है। उन्होंने आशंका जाहिर की कि यह अदालत सज़ा पर रोक नहीं लगाती है तो पाकिस्तान इसी तरह पर्दे के पीछे श्री जाधव को फांसी भी दे सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से कहा कि ऐसे सभी आवश्यक कदम उठाए जायें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पाकिस्तान इस याचिका का निपटारा होने तक श्री जाधव को फांसी नहीं दे। श्री जाधव की फांसी पर रोक के लिये उन्होंने दलील दी कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की नियमावली में अनुच्छेद 74 के अंतर्गत किसी देश को दिये गये अंतरिम निर्देश बाध्यकारी होते हैं और सभी देशों को उसे मानना होता है। श्री साल्वे ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई करने का अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को पूरा अधिकार है। न्यायालय पहले भी विएना संधि के उल्लंघन संबंधी तीन मामलों की सुनवाई कर चुका है।

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