जल के महत्व, अनिवार्यता, बर्बादी के कारणों पर प्रकाश

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पर्यावरणविद व जल स्टार रमेश गोयल ने गत दिवस सरस्वती सीनीयर सैकेन्डरी स्कूल जैतो (पंजाब) के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए जल के महत्व, अनिवार्यता, बर्बादी के कारणों पर प्रकाश डाला और जल बचत की आवश्यकता व उपाय बताये।  उन्हांेने जल बचाने से बिजली व धन बचने की भी जानकारी दी तथा स्वच्छता के लिए खुल्ले में कूड़ा-कर्कट न डालने  के साथ साथ पेड़ बचाने के लिए कागज बेकार न करने व पिछले साल की कापियों में से खाली कागज निकाल कर कापी तैयार करने का उपाय भी बताया। श्री गोयल जैतों अपने निजी कार्य से कुछ देर के लिए गए थे परन्तु पास ही स्कूल देखकर प्रधार्नाचार्या मधु कालड़ा से मिलकर अपने मिशन के बारे में बताया। प्रधानाचार्या ने तुरन्त सैंकड़ों बच्चों को एक हाल में एकत्रित कर कार्यक्रम करा दिया। उल्लेखनीय है कि वे जहां भी जाते हैं इसी प्रकार पर्यावरण एवमृ जल बचत का सन्देश देने स्कूलों में पहुंच जाते हैं। गत दिनों एक विवाह समारोह में रायसिंहनगर गए थे और वहां कन्या व. मा. विद्यालय मे सम्बोधित कर आए थे।   हरियाणा व दिल्ली के अतिरिक्त रामेश्वरम्, उज्जैन, वाराणसी, नाथद्वारा, उदयपुर, श्री गंगानगर आदि अनेक स्थानों पर वे इस प्रकार सैंकड़ंांे स्कूलों में सम्बोधित कर चुके हैं। श्री गोयल के नेतृत्व में पर्यावरण-प्रेरणा संस्था के तत्वावधान में गत दस वर्षों से इसी प्रकार अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए है। इस विषय में रूचि रखने वाले लोग संस्था से जुड़ते जा रहे हैं जिसके फलस्वरूप संस्था की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बन चुकी है।  इनके द्वारा रचित ‘जल चालीसा‘  अब तक लाखों लोग पढ़ चुके हैं।  


 श्री गोयल के नेतृत्व में 27 अप्रैल 2017 वीरवार पर्यावरण एवम् जल संरक्षण रैली का आयोजन किया गया जिसमें आर के सीनीयर सैकेन्डरी स्कूल, विवेकानन्द वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा एस एस जैन व मा. विद्यालय के सैंकड़ों छात्र छात्राओं व नगर के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।  टाउन पार्क सिरसा से चलकर  नेहरु पार्क पर विसर्जित इस रैली को सीडीएलयू के कुलपति श्री विजय कायत ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। जल बचेगा-जीवन बचेगा, पर्यावरण बचायेंगे-पेड़ हम लगायेंगे।पानी भी बचायेंगे- बिजली भी बचायेंगे, पाइप लगाकर फर्श न धोएं-गाड़ी पर हम जल न खोएं,, खुल्ले में कूड़ा-नहीं डालेंगे नहीं डालेंगे, कागज बचेगा-पेड़ बचेगा, आओ हम संकल्प करें- पेड़ जरूर लगाएंगे, टूंटी कभी न -खुल्ली छोड़ें , बूँद बूँद से - घट भरता है. जैसे नारो से शहर गूंज उठा।
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