कानून के मुताबिक एनडीटीवी प्रवर्तकों पर कार्रवाई : सीबीआई

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नयी दिल्ली, 06 जून, टेलीविजन चैनल एनडीटीवी के प्रवर्तकों पर बैंक धोखाधड़ी के सिलसिले में मारे गये छापों को लेकर उठाये गये सवालों पर केन्द्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) ने सफाई दी है कि सक्षम न्यायालय के जांच वारंट जारी करने के बाद ही यह कदम उठाया गया है। ब्यूरो ने आज जारी बयान में कहा कि उसने एनडीटीवी के किसी पंजीकृत कार्यालय , मीडिया स्टूडियो, समाचार कक्ष अथवा परिसर में छापा नहीं मारा है। गौरतलब है कि एनडीटीवी के सह संस्थापक और सह अध्यक्ष प्रणय राॅय और उनकी पत्नी राधिका रॉय, एक निजी कंपनी तथा कुछ अन्य पर सीबीआई ने आईसीआईसीआई बैंक को 48 करोड़ रुपये के कथित नुकसान को लेकर दिल्ली और देहरादून में चार स्थानों पर छापा मारा था । सीबीआई ने कहा कि वह प्रेस की आजादी का पूरा सम्मान करती है और वह समाचार परिचालन के स्वतंत्र कार्य करने के लिये प्रतिबद्ध है। ब्यूरो ने आईसीआईसीआई बैंक के एक शेयर धारक की शिकायत पर मामला पंजीकृत किया और उसके बाद कार्रवाई की । उसने कहा कि ब्यूरो किसी के दबाव में काम नहीं करता और उस पर आरोप लगाकर उसकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया । छापे अदालत की प्रक्रिया के तहत डाले गये। जांच का जो भी नतीजा होगा, वह सक्ष्म न्यायालय के समक्ष रखा जायेगा। बयान में कहा गया है कि एनडीटीवी और उसके प्रवर्तकों ने कहा है कि किसी भी कर्ज को चुकाने में चूक नहीं हुई है। ब्यूरो ने कहा कि आरोप के तहत जो जांच की गयी है वह ऋण के पुर्नभुगतान से संबंधित नहीं है बल्कि श्री राॅय, श्रीमती राॅय मेसर्स आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के गलत तरीके से 48 करोड रुपये के फायदे से जुड़ा हुआ है। बैंक ने शिकायत में आरोप लगाया कि उपरोक्त ने बैंक के अज्ञात अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश की , जो बैंक नियम कानून की धारा 19 (2) का उल्लंघन है। कल मारे गये छापों के बाद एनडीटीवी ने सीबीआई के न्याय क्षेत्र को लेकर सवाल खड़े किये थे। ब्यूरो ने रमेश गहली और सीबीआई के साथ 2016 के उच्चतम न्यायालय के एक मुकदमे का हवाला देते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1928 के प्रावधान निजी बैंकों के अधिकारी पर लागू होते है। इसी आधार पर सीबीआई ने यह जांच की ।

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