बिरसा मुंडा पर बनी फिल्म सिनेमा घरों में दिखायी जाएगी

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नयी दिल्ली, 10 जून, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं आदिवासियों के जननायक बिरसा मुंडा के जीवन पर बनी फिल्म अब सिनेमा घरों में दिखाई जायेगी। इस फिल्म के नए संशोधित रूप का कल यहां बिरसा मुंडा की 177 वीं रिपीट 177 वीं पुण्यतिथि पर औपचारिक रूप से प्रदर्शन किया गया। करीब सवा दो घंटे की इस फिल्म को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष करिया मुंडा के सरकारी आवास पर दिखाया गया। फिल्म सेंसर बोर्ड के सलाहकार अशोक शरण द्वारा निर्मित एवं निर्देशित इस फिल्म की कहानी श्री करिया मुंडा ने ही लिखी है। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौर भी इस शो के लिए आये थे। श्री शरण ने यूनीवार्ता को बताया कि यह फिल्म 2004-05 में बनी थी जो करीब साढ़े तीन घंटे की थी। इसके लिए 46 जगहों पर शूटिंग हुई थी लेकिन अब इसे नए रूप में बनाया गया है जिसकी अवधि सवा दो घंटे की है। अब इस फिल्म को सिनेमा घरों में दिखाया जायेगा क्योंकि पहले यह फिल्म देश भर में सार्वजानिक रूप से नहीं दिखाई जा सकी थी। श्री मुंडा ने बताया की जब शुरू में यह फिल्म बनी थी तब रांची में एक शो रखा गया था लेकिन तब ईसाई समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया था क्योंकि बिरसा मुंडा ईसायों द्वारा धर्मांतरण के विरोधी थे और यह बात फिल्म में भी दिखाई गयी थी इसलिए अब नए संशोधित रूप में इस फिल्म को स्कूल-काॅलेजों में भी दिखाने का प्रयास किया जायेगा और इस बारे में सरकार से अनुरोध किया जायेगा ताकि नयी पीढ़ी के लोग बिरसा मुंडा के साहसिक एवं ऐतिहासिक योगदान को जान सकें। उनके बीच यह सन्देश जाये कि इस देश के आदिवासियों ने किस तरह जंगल जमीन और संस्कृति तथा पर्यावरण को बचाए रखा है। सरकार के नीतिकारों को भी यह जानना जरूरी भी है। फिल्म से लोगों को प्रेरणा मिलेगी। इस फिल्म में वीरेन्द्र मिश्र, रजा मुराद, टॉम आल्टर और पेंटल ने भूमिका अदा की है। श्री शरण के अनुसार 10 साल के शोध के बाद यह फिल्म बनी है। पन्द्रह नंबर 1875 को रांची के उलीहातू में जन्मे बिरसा मुंडा का निधन मात्र 25 साल की उम्र में रांची जेल में हो गया था। उन्होंने अंग्रेजों के वन अधिकार क़ानून के खिलाफ आदिवासियों की सेना बनाकर उन पर हमला किया था।

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