कार्टोसैट उपग्रह प्रक्षेपण: आसमान में मिली भारत को एक और नजर

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 श्रीहरिकोटा आंध्रप्रदेश 23 जून, भारत ने आज एक ऐसे उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया है, जो इसकी सैन्य निरीक्षण क्षमताओं को बढ़ावा देगा।इसके साथ ही 30 अन्य छोटे उपग्रहों को भी कक्षा में स्थापित किया गया है। इन 30 छोटे उपग्रहों में से एक उपग्रह को छोड़कर बाकी सभी उपग्रह विदेशी हैं। आज का प्रक्षेपण भारत के किफायती अंतरिक्ष कार्यक््रम के लिए एक और उपलब्धि है। अपनी 40वीं उड़ान में पीएसएलवी सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से सुबह नौ बजकर 29 मिनट पर उड़ा और इसके 27 मिनट बाद इसने उपग्रहों को कक्षा में प्रक्षेपित कर दिया। 44.4 मीटर लंबा पीएसएलवी-सी38 अपने साथ पृथ्वी के पर्यवेक्षेण वाले उपग्रह यानी कार्टोसैट-2 श्रृंखला के उपग्रह को प्राथमिक पेलोड के तौर पर साथ लेकर गया है। इसके अलावा वह अपने साथ 30 अन्य उपग्रहों को ले गया है। इन उपग्रहों का कुल वजन 955 किलो है। आज के मिशन में इसरो द्वारा एक ही रॉकेट से प्रक्षेपित उपग्रहों की संख्या दूसरी सबसे बड़ी संख्या रही है। इस साल 15 फरवरी को पीएसएलवी-सी37 ने एक ही बार में 104 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करके इतिहास रच दिया था। इनमें से 101 उपग्रह विदेशी थे। कार्टोसैट-2 श्रृंखला के तीसरे उपग्रह के प्रक्षेपण के साथ ही अंतरिक्ष में भारत की नजर और पैनी एवं व्यापक होनी तय है। इसरो के सूत्रों ने कहा कि इस श्रृंखला के पिछले उपग्रह की विभेदन क्षमता 0.8 मीटर की थी और इससे ली गई तस्वीरों ने पिछले साल नियंत्रण रेखा के पार सात आतंकी ठिकानों पर सजर्किल हमले करने में भारत की मदद की थी। हालिया रिमोट सेंसिंग उपग्रह की विभेदन क्षमता 0.6 मीटर की है। इसका अर्थ यह है कि यह पहले से भी छोटी चीजों की तस्वीरें ले सकता है। इसरो के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पीटीआई भाषा से कहा, यह किसी चीज को 0.6 मीटर की लंबाई और 0.6 मीटर की चौड़ाई वाले वर्ग के बीच मौजूद चीजों को चिन्हित कर सकता है। अधिकारी ने कहा, रक्षा निरीक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इसका इस्तेमाल आतंकी शिविरों और बंकरों आदि की पहचान के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उपग्रह के सक्रिय हो जाने पर इसे रक्षा बलों को सौंप दिया जाएगा। रक्षा बलों का अपना पूरा तंत्र है, जिसमें डेटा तक पहुंच बना सकने वाले जमीनी स्टेशन और प्रशिक्षित कर्मी शामिल हैं। इसरो ने कहा कि 16 मिनट की उड़ान के बाद कार्टोसैट-2 श्रृंखला का उपग्रह 505 किलोमीटर की उंचाई पर स्थित ध्रुवीय सौर स्थैतिक कक्षा तक पहुंच गया।इसके बाद अन्य 30 उपग्रह सफलतापूर्वक पूर्वनिर्धारित क्रम में पीएसएलवी से अलग हो गए।


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