विशेष : अब मगरमच्छों का आतंक से खौफजदा है चंबल घाटी

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इटावा ,07 जून, कभी खूंखार डाकुओं की शरणस्थली के तौर पर कुख्यात चंबल घाटी में इन दिनो मगरमच्छ के आतंक से खौफजदा है। घडियाल,मगरमच्छ और डाल्फिन जैसे हजारों दुर्लभ जलचरो के संरक्षित करने मे जुटी चंबल नदी मे पाये जाने वाले मगरमच्छ अब नरभक्षी हो चुके है । मगरमच्छो के बढते आंतक के कारण चंबल नदी के बसर करने वाले गांव वालो मे खासी दहशत देखी जा रही है। हाल ही में सोमवार की शाम को चंबल नदी में नहाने गयी नीरज नामक एक लडकी को मगरमच्छ ने अपना निवाला बना लिया। मॉ उर्मिला ने बताया कि नीरज और अन्य लोग चंबल नदी मे नहा रहे थे कि अचानक एक मगरमच्छ ने नीरज (19) को जकड लिया। नीरज मगरमच्छ के साथ ही पानी मे समा गई। लडकी के पिता शिवराम सिंह चौहान ने घटना की जानकारी कल पुलिस को दी। ऐसा माना जा रहा है कि लडके के शरीर को मगरमच्छ पूरी तरह से खा गये इसलिए चंबल नदी मे काफी खोजबीन के बाद भी शव का कोई हिस्सा नहीं मिल सका है। चंबल सेंचुरी के जिला वनाधिकारी (डीएफओ) डा.अनिल कुमार पटेल ने बताया कि घटना की जानकारी उनके संज्ञान मे आई है। सेंचुरी विभाग के अफसरो को सक्रिय कर दिया गया है । श्री पटेल ने बताया कि साल 2014 मे भरेह इलाके के पर्थरा गांव के पास रहने वाला 12 साल का किशोर प्रदीप मल्लाह अपने कई दोस्तो के साथ चंबल नदी मे नहा रहा था। इस बीच एक मगरमच्छ ने उसको दबोच लिया। मगर के हमले के बाद प्रदीप के साथी बदहवास चंबल नदी के किनारे जोर जोर से चीखने चिल्लाने लगे। उसके बाद कई लोगो ने जुट कर प्रदीप को खोजने की कवायद की लेकिन उसका कोई सुराग नही लगा। करीब 24 घंटे बाद उसका शव क्षत विक्षत हालात मे चंबल नदी से बरामद हुअा था। प्रदीप के शरीर पर मगर के दांतो के आधा दर्जन से अधिक बडे बडे धाव देखे गये ।


इससे पहले चंबल नदी के किनारे बसे बिठौली क्षेत्र के ग्राम पुराखेड़ा निवासी रामप्रकाश उर्फ बड़े बिहार गांव के नजदीक बकरियो के चराते समय एकाएक गायब हो गये तो लोगो ने उनकी खोजबीन की तो हालात देख अंदाजा लगाया गया कि उनको मगरमच्छ निगल गया । पर्यावरणीय संस्था सोसायटी फार कंजर्वेशन आफ नेचर के सचिव संजीव चौहान का कहना है कि चंबल नदी में लगभग 40 वर्ष तक की उम्र के मगरमच्छ और घड़ियाल देखे गये हैं । इनका विशालकाय शरीर देखकर ही आम आदमी के होश उड़ जाते हैं । ज्यादा तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि आम आदमी तो उनके लिये कुछ भी नहीं है । यदि गहरे पानी में मगरमच्छ को हाथी भी मिल जाए तो शायद वह भी जिंदा नहीं निकल सकता। इंसान तो इसांन जानवर भी मगरमच्छो से परेशान है । उन्होंने बताया कि बिहार गांव निवासी साधूराम का एक भैंसे को मगरमच्छ ने नदी में पानी पीते समय दबोच लिया जब ग्रामीणों के द्वारा उसके उपर पत्थर मारे गये, तब उसने बड़ी मुश्किल से भैंसा को छोड़ा था । इस दौरान भैंसा के शरीर पर कई गहरे दांतों के निशान भी देखे गये थे । उपरोक्त वाकये से मालूम होता है कि अब किसी भी समय कहीं पर भी चंबल नदी में नहाना खतरे से खाली नही है। चंबल नदी में न नहाने में ही सभी की भलाई है। श्री चौहान ने बताया कि इटावा के पास खेडाराठौर गांव के आसपास चंबल नदी खेड़ा राठौर के महुआशाला गांव में करीब 40 वर्षीय हीरा सिंह भेड़-बकरियां चराने बीहड़ में गए थे ।

बताया गया है कि चारा खिलाने के बाद हीरा सिंह पशुओं को नहलाने चंबल नदी में उतर गए । इसी दौरान मगरमच्छ ने हीरा सिंह को अपने जबड़े में बुरी तरह जकड़ लिया और गहरे पानी में खींच ले गया । इस पर हीरा सिंह चीखे-चिल्लाए। चीख सुनकर पास में पशुओं को चारा खिला रहे अन्य ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक मगरमच्छ चरवाहे समेत गायब हो चुका था। इसके अलावा बाह के बासौनी के बीरमपुरा गांव निवासी उमेश, इसके बाद खेड़ा राठौर के धर्मपाल, रानीपुरा के मुकेश इनका शिकार हो चुके हैं । करीब एक माह पहले अंबाह क्षेत्र से बाह अपनी रिश्तेदारी में आ रहे रामबिहारी को भी मगरमच्छ ने बुरी तरह घायल कर दिया था। इससे पहले कमोनी घाट पर नहाते वक्त अपनी ससुराल आया बृजेश मगरमच्छ का शिकार हो गया था । चंबल सेंचुरी के डीएफओ डा.अनिल पटेल का कहना है कि रेहा घाट से लेकर पंचनदा तक घड़ियाल परियोजना चल रही है। इस क्षेत्र में बहने वाली चंबल नदी जलजीवों के लिए आरक्षित है। ग्रामीणों और राहगीरों को कई बार हिदायत दी गई है, फिर भी वे नदी के अंदर पहुंचकर जानबूझकर इनका शिकार बन रहे हैं। इस क्षेत्र में पूरी तरह से दिनचर्या पर रोक है।

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