पाकिस्तान में सैन्य शिविर बना सकता है चीन : पेंटागन

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वाशिंगटन, सात जून, चीन के पाकिस्तान एवं उन अन्य देशों में अतिरिक्त सैन्य अड्डों की स्थापना करने की संभावना है, जिनके साथ उसके लंबे समय से मित्रवत संबंध एवं समान सामरिक हित रहे हैं। पेंटागन ने एक नयी रिपोर्ट में यह बात उस वक्त कही है जब दुनिया की सबसे बड़ी सेना अपनी ताकत के विस्तार में जुटी हुई है। चीन के सैन्य जमावड़े पर अमेरिकी संसद में पेश अपनी वाषिर्क रिपोर्ट में अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जिबूती के सामरिक क्षेत्र में सैन्य अड्डे का निर्माण चीन का ऐसा पहला कदम है और संभवत: वह दुनिया में अपने मित्र देशों के बंदरगाहों पर सैन्य अड्डों का विस्तार करेगा। हिंद महासागर, भूमध्यसागर एवं अटलांटिक महासागर जैसे ‘‘सुदूरवर्ती समुद्री क्षेत्रों’’ में नियमित सैन्य तैनाती के लिए जरूरी साजो सामान की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चीन विदेशी बंदरगाहों तक अपनी पहुंच में विस्तार कर रहा है। पेंटागन ने कहा, ‘‘चीन अपने सैन्य अड्डों की स्थापना उन देशों में करना चाहेगा जिन देशों के साथ उसके लंबे समय से मित्रवत संबंध और समान सामरिक हित जुड़े रहे हैं जैसे कि पाकिस्तान और ऐसे देश जहां विदेशी सेना की मेजबानी के उदाहरण देखने को मिले हैं।’’ गौरतलब है कि चीन बलुचिस्तान में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ग्वादर बंदरगाह का विकास कर रहा है और कई अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने यह कदम वहां अपनी सैन्य मौजूदगी के उद्देश्य से उठाया है। पेंटागन की रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने कहा कि अमेरिका के रक्षा विभाग ने देश की सेना के संबंध में ‘‘गैरजिम्मेदाराना बयान’’ दिया है। बीजिंग में विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने संवाददाताओं से कहा, वाषिर्क रिपोर्ट में ‘‘चीन की राष्ट्रीय रक्षा विकास और हमारी सम्प्रभुता की सुरक्षा के लिए उठाये गये तर्कपूर्ण कदमों और सुरक्षा हितों पर तथ्यों से इतर बहुत गैरजिम्मेदाराना बयान दिया गया है।’’ हुआ ने कहा, ‘‘चीन उसका कड़ाई से विरोध करता है।’’ उन्होंने कहा कि बीजिंग दक्षिण-प्रशांत क्षेत्र और दुनिया में शांति तथा स्थिरता की सुरक्षा करने वाला बल है। हालांकि पीएलए के विदेशों में संभावित सैन्य अड्डों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए प्रवक्ता ने कहा कि चीन और पाकिस्तान घनिष्ठ मित्र हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर हित का सहयोग करते हैं।

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