आर्थिक वृद्धि में तेजी के लिए लक्षित हस्तक्षेप से मिलेगी मदद: आरबीआई

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मुंबई, सात जून, रिजर्व बैंक ने आज कहा कि नीतिगत दर में कटौती के बजाए आवास रिण के लिये मानक संपत्ति प्रावधान जैसे लक्षित हस्तक्षेप से धीमी पड़ी आर्थिक वृद्धि को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी। डिप्टी गवर्नर विरल आवार्य ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘वृद्धि चुनौतियों से निपटने के लिये नीतिगत दर में कटौती के बजाए लक्षित हस्तक्षेप अधिक कारगर हो सकता है ताकि बैंकों की अर्थव्यवस्था के वैसे क्षेत्रों में रिण देने की क्षमता बढ़े जिसमें हाल में नरमी आयी है।’’ उल्लेखनीय है कि जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2016-17 की जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.1 प्रतिशत पर आ गयी। दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा के बाद आचार्य ने यह बात कही। मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिये जीवीए :सकल मूल्य वर्धन: आधारित आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 0.10 प्रतिशत कम कर 7.3 प्रतिशत कर दिया। रिजर्व बैंक ने सांविधिक तरलता अनुपात :एसएलआर: 0.5 प्रतिशत घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया और साथ ही आवास रिण सस्ता करने के लिये कई उपाय किये। एसएलआर के तहत बैंकों को निश्चित राशि सरकारी बांड में लगानी होती है। शीर्ष बैंक ने व्यक्तिगत आवास रिण पर मानक संपत्ति प्रावधान या प्रत्येक कर्ज के एवज में अलग रखी जाने वाली राशि को 0.40 प्रतिशत से घटाकर 0.25 प्रतिशत किया गया है। इससे आवास रिण पर ब्याज दर में कमी लाने में मदद मिलेगी। साथ ही ऐसे कर्ज पर भारांश जोखिम भी कम किया है। रिजर्व बैंक ने दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में कहा, ‘‘उतार-चढ़ाव से निपटने के लिये व्यक्तिगत आवास रिण के मामले में रिण-मूल्य अनुपात :एलटीवी:, जोखिम भारांश तथा मानक संपत्ति प्रावधान दर में आज से संशोधन किया गया है।’’ एलटीवी से आशय रिण का खरीदी गयी संपत्ति के मूल्य के अनुपात से है। इसके अलावा कुछ श्रेणी के कर्ज के लिये जोखिम भारांश को कम किया गया है। इससे बैंकों को पूंजी पर्याप्तता के मोर्चे पर मदद मिलेगी और वे अधिक कर्ज दे सकेंगे।

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