प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा से भारत को ज्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ: माकपा

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नई दिल्ली 29 जून, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा से भारत को कुछ ज्यादा हासिल नहीं हुआ है और हाल ही में जारी संयुक्त वक्तव्य में भारत के अमेरिका के एक अधीनस्थ सहयोगी होने की पुन: पुष्टि होती है। पार्टी पोलित ब्यूरो ने यहां जारी एक बयान में कहा“ पिछले तीन वर्षों में श्री मोदी की यह पांचवी अमेरिकी यात्रा है और इससे भारत को शायद ही कुछ फायदा हुआ हो अथवा अमेरिका ने भारत की तात्कालिक चिंताओं पर कुछ ध्यान दिया होगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ जारी संयुक्त वक्तव्य में भारत के केवल अधीनस्थ सहयोगी के दर्जे के रूप में ही पुन: पुष्टि हुई है।” वक्तव्य में कहा गया है कि एचवनबी वीजा जो सूचना प्रौद्याेगिकी क्षेत्र के लाखों भारतीय पेशेवरों से जुड़ा है,अमेरिका में भारतीयों पर नस्ली हमलों की बढ़ती घटनाओं और पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के हटने जैसे मुद्दों पर कोई जिक्र नहीं किया गया है। पोलित ब्यूरो ने कहा कि दूसरी तरफ श्री मोदी ने अमेरिका के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को खोलने की प्रतिबद्वता व्यक्त कर दी है और यह अमेरिकी रक्षा उपकरणाें की बढ़ती खरीदारी के रूप मे होगा ,खासकर दो अरब डालर कीमत वाले ऐरियल ड्रोन विमानों की खरीद के रूप में इसे अमल में लाया जाएगा। माकपा ने कहा है कि विदेश नीति के मामलों में भारत अपनी पूर्व की प्रतिबद्वताओं से मुकर गया है अौर पहली बार उसने अमेरिका के सुर में सुर मिलाते हुए उत्तर कोरिया की निंदा की है और दक्षिण चीन समुद्र विवाद पर अमेरिका का साथ दिया है। सबसे ज्यादा दुखद यह है कि भारत ने आतंकवाद को धर्म से नहीं जोड़ने के अपने रूख में परिवर्तन करते हुए अमेरिका की स्थिति अपना ली है जिसमें आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ा गया है जबकि सरकार के प्रवक्ताओं ने कईं बार संसद में कहा था कि भारत में अातंकवाद का कोई धर्म नहीे है।

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