गुजरात चुनाव के लिए कोविंद बनाये गये राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार : शिवानंद

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पटना 22 जून, बिहार के पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी ने आज कहा कि भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने गुजरात विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर कोली बिरादरी के वोट को लुभाने के इरादे से श्री रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। श्री तिवारी ने यहां कहा कि श्री कोविंद कोली बिरादरी से आते हैं और वह इस बिरादरी के अखिल भारतीय संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। यह बिरादरी गुजरात-महाराष्ट्र में पिछड़ी जातियों की सूचि में शामिल है लेकिन उत्तर प्रदेश में यह अनुसूचित जाति है। उन्होंने कहा कि गुजरात में संख्या के दृष्टिकोण से यह ताकतवर जाति है और उसकी आबादी वहां करीब 18 से 24 प्रतिशत है। पूर्व मंत्री ने कहा कि देश की राजनीति में रुचि रखने वाले जानते हैं कि गुजरात में पाटीदार बिरादरी के लोग संपन्न माने जाते हैं। किसानी के अतिरिक्त कपड़ा, शिक्षा, भवन निर्माण तथा छोटे और मध्यम कल कारख़ानों का स्वामित्व भी उनके पास रहा है लेकिन किसानी की हालत ख़राब है।अर्थव्यवस्था में गंभीर मंदी की वजह से छोटे और मध्यम क्षेत्र के कल-कारख़ाने या तो बंद हैं या बीमार हैं। अपनी इस हालत के लिए वे सरकार की नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए ही यह बिरादरी गुजरात में सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन की राह पर है और इस आंदोलन का नेतृत्व हार्दिक पटेल कर रहे हैं। श्री तिवारी ने कहा कि गुजरात की आबादी में पाटीदार 12-13 प्रतिशत हैं। कांग्रेसी मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी ने जब गुजरात में पिछड़ों के लिए आरक्षण लागू किया था तब उसके विरोध की अगुवाई पाटीदारों ने ही की थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उस आरक्षण विरोधी आंदोलन का रणनीतिकार था। उन्होंने कहा कि भाजपा के श्री केशु भाई पटेल उसी आंदोलन से उभर कर सामने आए थे और मुख्यमंत्री बने थे। 


पूर्व मंत्री ने कहा कि गुजरात में भाजपा की सरकार बनवाने में पटेलों की मुख्य भूमिका रही थी लेकिन आज पटेल वहां की सरकार के ख़िलाफ़ दिखाई दे रहे हैं। अगले वर्ष होने वाले वहां के विधान सभा चुनाव में पटेलों का वोट मिलेगा या नहीं इसको लेकर भाजपा आश्वस्त नहीं है। उन्होंने कहा कि गुजरात का चुनाव श्री नरेंद्र मोदी और श्री अमित शाह के लिए उत्तर प्रदेश के चुनाव से कम महत्वपूर्ण नहीं है।वहां की हार इन दोनों की व्यक्तिगत हार मानी जाएगी। श्री तिवारी ने कहा कि श्री रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाने के पीछे उनका दलित होना या सज्जन और भद्र मानुष होना कोई मतलब नहीं रखता है। उनका असली मक़सद हर हाल में गुजरात विधानसभा का चुनाव जीतना है। इसलिए श्री कोविंद की जाति (कोली) का अठारह प्रतिशत वोट बहुत माने रखता है। उन्होंने कहा कि श्री कोविंद अपनी बिरादरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में गुजरात में काफ़ी सक्रिय रहे हैं और वहां के कोलियों को उनकी जाति का परिचय बताने की ज़रूरत नहीं है। पूर्व मंत्री ने कहा कि वोट की राजनीति में येन केन वोट हासिल करना कोई अपराध नहीं है। सब यह कर भी रहे हैं। लेकिन, जब श्री लालू प्रसाद यादव, श्री नीतीश कुमार, श्री मुलायम सिंह यादव और सुश्री मायावती या अन्य वोट के लिए जातियों का ताना-बाना बुने तो वह घिनौना है। वहीं श्री नरेंद्र मोदी और श्री अमित शाह वोट के लिए देश के सर्वोच्च पद को दाव पर लगा दें तो वह पवित्र है । इसे बीमार दृष्टिकोण ही कहा जायेगा। 

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