ट्रंप के न्यौते पर 25 जून को अमेरिका जायेंगे मोदी

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नयी दिल्ली 12 जून, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर 25 जून को दो दिन की अमेरिका यात्रा पर जायेंगे, दोनों अनूठे नेताओं के बीच मुलाकात पर विश्वभर के कूटनीतिज्ञ विशेषज्ञों की निगाहें होंगी जहां उनके बीच परंपरागत द्विपक्षीय, बहुपक्षीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों के साथ साथ पेरिस समझौते पर भी बात होने की संभावना है। श्री ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली अमेरिका यात्रा है। श्री मोदी यात्रा के दूसरे दिन 26 जून को श्री ट्रप के साथ वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात होगी। इस मुलाकात की विश्वभर के कूटनीतिक हलकों में प्रतीक्षा की जा रही है। विदेश मंत्रालय ने आज यहां बताया दोनों नेता भारत तथा अमेरिका के बीच सामरिक साझेदारी के विभिन्न आयामों तथा अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ बनाने के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार श्री मोदी श्री ट्रंप के साथ आतंकवाद से मुकाबले सहित विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत करेंगे जिनमें एच1बी वीसा, पर्यावरण संरक्षण संबंधी पेरिस समझौते प्रमुख होंगे। श्री ट्रंप ने हाल ही में पेरिस समझौते से यह कह कर बाहर आने का ऐलान किया था कि इससे भारत एवं चीन जैसे देशों को अरबाें डॉलर की कमाई होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान को भारत अमेरिका संबंधों में गतिरोध के रूप में भी देखा जा रहा है। लेकिन श्री मोदी ने भी रूस की यात्रा के दौरान इसका जवाब देते हुए कहा था कि भारत ने पर्यावरण के संरक्षण के अपनी 5000 साल पुरानी प्रतिबद्धता के तहत पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं और वह समझाैते से पीछे नहीं हटेगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस माह अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में इस आशय के एक सवाल के जवाब में कहा था कि श्री ट्रंप के प्रशासन के साथ भी भारत के वैसे ही रिश्ते हैं जैसे श्री ओबामा के प्रशासन के साथ थे। उन्होंने कहा “भारत और अमेरिका के संबंध परस्पर लाभ पर आधारित हैं और दोनों देशों के संबंध पहले की रफ्तार से ही बढ रहे हैं।” अमेरिका को भारत का बड़ा रक्षा सहयोगी बताते हुए उन्होंने कहा,“प्रधानमंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से तीन बार बात की है, अधिकारियों की आपस में बात होती रही हैं । यह बातचीत सकारात्मक और अच्छी रही है।” श्री ट्रंप के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों के बारे में पूछे गये सीधे सवाल पर उन्होंने कहा, “उनकी तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है जिससे यह लगे कि दोनों देशों के विशेष संबंधों में किसी तरह की कमी आई है। ” हालांकि श्री ट्रंप के पेरिस समझौते से हटने की घोषणा और जलवायु परिवर्तन आर्थिक मदद को लेकर भारत पर टिप्पणी पर श्रीमती स्वराज ने कहा कि पेरिस समझौते को लेकर भारत की प्रतिबद्धता अक्षुण्ण रहेगी चाहे अमेरिका उसमें रहे या नहीं रहे। पर्यावरण एवं प्रकृति का संरक्षण भारत की 5000 साल पुरानी संस्कृति में निहित है। उन्होंने कहा, “यह आज की प्रतिबद्धता नहीं है। हमारी प्रतिबदद्धता 5000 साल की है। नदियों और वृक्षों की पूजा, यह भारतीय सांस्कृतिक धरोहर है। इसलिए कोई कहे कि दबाव या पैसे के लेकर हस्ताक्षर किए तो मैं ये आरोप खारिज करती हूं।” एच-1बी वीजा के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में विदेश मंत्री का कहना है कि अभी तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। 2004 के बाद से 65 हजार ऐसे वीसा की सीमा निर्धारित है, जो यथावत है। वीसा लॉटरी के आधार पर अब भी दिये जा रहे हैं। पीएचडी करने वालों को 20 हजार वीसा की सीमा भी पूर्ववत है। उन्होंने कहा कि कुछ निर्णय कार्यकारी आदेश से नहीं लिये जा सकते हैं। उनके लिये अमेरिकी कांग्रेस में विधेयक लाना होता है। भारत सरकार ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के अलावा सांसदों के भी संपर्क में हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी भी अमेरिका में ट्रंप प्रशासन से इस बारे में बात करेंगे।

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