नीतीश सरकार ने किसानों से खरीदे केवल 18 मिट्रिक टन धान : सुशील मोदी

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पटना 12 जून, बिहार भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)विधानमंडल दल के नेता एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राज्य की नीतीश सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुये आज कहा कि सरकार ने इस बार किसानों से केवल 18 मिट्रिक टन धान की खरीद की है।  श्री मोदी ने यहां कहा कि बिहार में इस साल 90 लाख मिट्रिक टन धान की पैदावार हुई लेकिन सरकार केवल 18 लाख मिट्रिक टन की ही खरीद कर पाई। इसका नतीजा यह हुआ कि किसानों को औने-पौने दाम पर धान बेचने के लिए विवश होना पड़ा। उन्होंने कहा कि फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) चाहे जितना भी निर्धारित कर दिया जाए यदि सरकार किसानाें से उनकी ऊपज खरीदेगी ही नहीं तो किसानों को लाभ कैसे मिलेगा। भाजपा नेता ने कहा कि यदि नीतीश सरकार प्रधानमंत्री फलस बीमा योजना के तहत बीमा कम्पनियों के कार्यकलाप से संतुष्ट नहीं है तो उसे अपनी बीमा कम्पनी खोल कर किसानों का बीमा करने से किसने रोका है। उन्होंने कहा कि केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपनी अनेक योजनाओं से देश के किसानों को लाभान्वित करने के लिए प्रयासरत है। क्या किसान हितों की चिन्ता करने की जिम्मेवारी राज्य सरकारों की नहीं है। 


श्री मोदी ने कहा कि कृषि ऋण के ब्याज पर केन्द्र सरकार पांच प्रतिशत अनुदान देती है जिसके कारण किसानों को मात्र चार प्रतिशत ब्याज ही देना पड़ता है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा आदि कई राज्यों की सरकारें किसानों को ब्याज रहित कर्ज देती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के कार्यकाल के दौरान बिहार के किसानों को भी ब्याज पर एक प्रतिशत की सब्सिडी दी गई थी, जो पिछले तीन साल से बंद है। भाजपा नेता ने सवालिया लहजे में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बतायें कि कृषि कैबिनेट को क्यों भंग कर दिया गया। सरकार के महत्वाकांक्षी सात निश्चय कार्यक्रम में कृषि को क्यों नहीं शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि कृषि के बजट में भारी कटौती क्यों कर दी गई। पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनावी साल (वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव) में धान खरीद पर किसानों को 200 रुपये बोनस देने वाली सरकार ने इस साल इस मद में एक पैसा भी क्यों नहीं दिया। डीजल अनुदान, कृषि यांत्रिकरण, किसान पाठशाला जैसी सारी योजनाएं बुरी तरह से विफल क्यों हो गई। उन्होंने कहा कि क्या मुख्यमंत्री श्वेत पत्र जारी कर बतायेंगे कि दूसरे कृषि रोड मैप (2012-17) क्यों विफल हो गया। 
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