तथ्य : सोनिया, राहुल की विदेश यात्राओं का ब्योरा नहीं

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नयी दिल्ली, 08 जून, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दस वर्ष के शासनकाल के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की विदेश यात्राओं के बारे में सरकारी तौर पर कहीं कोई ब्योरा उपल्बध नहीं है। यह दावा वरिष्ठ पत्रकार श्यामलाल यादव ने हाल में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘जर्नलिज्म थ्रू आरटीआई’ में किया है। संप्रग सरकार के दाैरान दोनों नेता लोकसभा के सदस्य थे। श्रीमती गांधी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) की अध्यक्ष थीं और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। पिछली सरकार और मौजूदा सरकार के दौरान सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारी सामने आयी है उसके अनुसार श्रीमती गांधी की सिर्फ एक विदेश यात्रा (जुलाई 2004 की बैंकाक यात्रा ) के अलावा किसी और यात्रा का ब्योरा सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। बाध्यकारी नहीं होने के बावजूद अधिकतर सांसद अमूूमन अपनी निजी विदेश यात्राओं के बारे में लोकसभा या राज्यसभा सचिवालय को सूचित करते हैं। पुस्तक के अनुसार श्रीमती गांधी और श्री गांधी ने अपनी विदेश यात्राओं के बारे में लोकसभा को कभी कोई सूचना नहीं दी। पिछले एक दशक में सूचना के अधिकार के तहत सरकारी विभागों से जानकारी निकाल कर अनेक खबरें देने वाले श्री यादव ने कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं की विदेश यात्राओं की जानकारी हासिल करने के कई प्रयास किये लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और एनएसी से उन्हें श्रीमती गांधी की बैंकाक यात्रा के अलावा कोई और जानकारी नहीं मिली। उन्होंने प्रमुख नेताओं की विदेश यात्राओं के बारे में सूचना रखने वाले अन्य विभागों को भी खंगाला लेकिन उन्हें कुछ भी हाथ नहीं लगा। इससे वह इस नतीजे पर पहुंचे कि इन दोनों नेताअों की विदेश यात्राओं के बारे में कहीं कोई जानकारी नहीं है।

          
दोनों नेताओं की विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी मांगे जाने पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस मसले को लोकसभा सचिवालय के मुख्य सूचना अधिकारी को इस अनुरोध के साथ भेज रहे हैं कि वह इस बारे में उपलब्ध सूूचना सीधे उपलब्ध करा दें। लोकसभा सचिवालय इस बारे में मांगी गयी जानकारी पर अपने जवाब में कहा कि परंपरा के अनुसार लोकसभा सदस्य अपनी निजी या सरकारी विदेश यात्रा के बारे में लोकसभा अध्यक्ष को सूचना देते हैं लेकिन ऐसा कोई नियम नहीं है कि सदस्यों को अपनी विदेश यात्रा के बारे में पहले से या बाद में अध्यक्ष को सूचित करना जरूरी हो। सचिवालय ने एक अन्य जवाब में कहा कि 2004 से 2012 के दौरान श्रीमती गांधी और श्री गांधी विदेश जाने वाले किसी भी संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं रहे। इसलिये विदेश मंत्रालय से उनकी यात्रा को मंजूरी देेने की मांग नहीं की गयी। इस बारे में जानकारी मांगे जाने पर कि क्या ऐसे व्यक्तियों की कोई सूची है जिन्हें विदेश यात्रा के लिये राजनीतिक मंजूरी लेने से छूट प्राप्त है और क्या एसपीजी या एनएसजी सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों को किसी तरह की छूट प्राप्त है तो विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस आवेदन को गृह मंत्रालय को इस अनुरोध के साथ भेज रहा हैै कि वह इस बारे में सूचना सीधे उपलब्ध करा दी जाये। गृह मंत्रालय का इस पर जवाब था कि विदेश जाने के संबंध में किसी तरह की राजनीतिक छूट देने का मामला पूरी तरह से विदेश मंत्रालय का है जो अपना जवाब दे चुका है। फिर भी आरटीआई आवेदन की प्रति कैबिनेट सचिवालय और एनएसजी के पास भेजी जा रही है कि उनके पास यदि कोई जानकारी हो तो उसे उपलब्ध करा दें। इस पर कैबिनेट सचिवालय का जवाब काफी रोचक था।

उसने कहा कि पता नहीं क्यों यह आवेदन उसके पास भेजा गया। विदेश यात्राओं काे मंजूरी देने का एकाधिकार विदेश मंत्रालय का है। इस मामले में उसके द्वारा कोई निर्देश जारी नहीं किये गये। इसलिये वह इस आवेदन को विदेश मंत्रालय को लौटा रहा है। एनएसी से इस बारे में जानकारी मांगे जाने पर कहा कि श्रीमती गांधी ने परिषद के अध्यक्ष के रूप में जुलाई 2014 में बैंकाक की यात्रा की थी तथा उस पर 222939 रुपये खर्च हुये थे। बाद में एनएसी ने स्पष्ट किया कि 31 मई 2004 के कैबिनेट सचिवालय के आदेश के अनुसार एनएसी के पदाधिकारियों के सभी खर्च प्रधानमंत्री कार्यालय के माध्यम से केंद्र सरकार उठायेगी तथा सभी सूचनायें प्रधानमंत्री कार्यालय के पास होंगी। 2014 में श्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद नये सिरे से किये गये आरटीआई आवेदन के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि श्रीमती गांधी आैर श्री गांधी की विदेश यात्राओं की सूचना उसके रिकाॅर्ड का हिस्सा नहीं है। हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय के रिकार्ड के अनुसार श्रीमती गांधी ने एनएसी के अध्यक्ष के रूप में अंतर्राष्ट्रीय एड्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिये 14 से 17 जुलाई 2004 तक बैंकाक की यात्रा की थी।

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