श्रीमद राजचंद्र पर जारी डाक टिकिट का हुआ लोकार्पण

  • महात्मा गांधी के आध्यात्मिक गुरु पर हुआ डाकटिकिट जारी


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पूना, 30 जून 2017। भारत सरकार के डाक विभाग की ओर से शुक्रवार (दिनांक: 29 जून 2017) श्रीमद राजचंद्र पर 5 रुपय्ो का स्मारक डाक टिकिट जारी किय्ाा गय्ाा, जिसका लोकार्पण पूना शहर के कात्रज स्थित आनंद दरबाद में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक महासंघ एवं जैनिज्म फिलैटली ब्यूरों के पदाधिकारियों द्वारा श्रमण संघीय्ा सलाहकार दिनेश मुनि के सान्निध्य में किया गया। जिससे जैन समाज में हर्ष की लहर व्याप्त हो गई। जैनिज्म फिलैटली के सदस्य श्रमण डाॅ. पुष्पेन्द्र ने जानकारी देते हुए बताया कि महात्मा गांधी और श्रीमद राजचंद्र की मुलाकात 1891 में हुई थी और वे उनके शास्त्रों के ज्ञान और गहरी समझ से बहुत प्रभावित हुए थे जिसका जिक्र उनकी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ में भी मिलता है। महात्मा गांधी ने लिखा है कि उनके अध्यात्मिक जीवन पर जिन लोगों ने सबसे अधिक असर डाला है उनमें श्रीमद राजचंद्र अग्रणी थे जिन्हें गांधी प्यार से रायचंद भाई कहते थे। अपने अफ्रीका प्रवास के दौरान गांधी सभी अंगरेजी जानने वालों को टॉल्सटॉय की किताबें और गुजराती भाइयों को रायचंद भाई की ‘आत्म सिद्धि’ पढ़ने की सलाह देते थे। श्रीमद राजचंद्र के बारे में कहा जाता है कि उन्हें अपने पिछले कई जन्मों की बातें याद थीं और उनकी स्मरण शक्ति बहुत तेज थी। पूरी दुनिया उन्हें आत्म-साक्षात्कार का ज्ञान देने वाले संत के रूप में जाने जाते हैं। यह वर्ष श्रीमद राजचंद्र की 150 वीं जन्म जयन्ती मना रहा है इसी मौके पर डाक विभाग के फिलैटली ब्यूरोें द्वारा उनकी स्मृति में पांच रु. का स्मारक डाक टिकिट जारी किया गया। लोकार्पण के अवसर पर डाॅ. द्वीपेन्द्र मुनि, महासंघ संघपति बालासाहेब धोका, जैन कान्फ्रेंस के राष्ट्रीय महामंत्री डाॅ. अषोक पगारिया, जैन कान्फ्रेंस के पूर्व उपाध्यक्ष विजयकांत कोठारी, जैनिज्म फिलैटली के राष्ट्रीय महासचिव मीठालाल जैन, मुम्बई से पधारे रषेष भाई दोषी व प्रकाष सिंयाल, लुधियाना से विजय जैन हैदराबाद संघपति सुरेष कीमति इत्यादि गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।   

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