रेलवे का निजीकरण नहीं, बुलेट ट्रेन जल्द : मनोज सिन्हा

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रांची 04 जून, केंद्रीय रेल एवं संचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा ने रेलवे का निजीकरण होने की अटकलबाजियों पर विराम लगाते हुये आज स्पष्ट किया है कि निजीकरण नहीं होगा और सरकार की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन योजना को धरातल पर उतारने की दिशा में काम शुरु हो गया है। श्री सिन्हा ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर यहां भाजपा कार्यालय में केंद्र सराकर का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कहा कि रेल सेवा के निजीकरण की बात बेबुनियाद है और सरकार रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए कृतसंकल्पित है। उन्होंने बताया कि स्पीड ट्रेन और बुलेट ट्रेन चलाने की दिशा में भी प्रयास शुरु कर दिया गया है। अभी मुंबई से अहमदाबाद तक जापान के सहयोग से ट्रेन चलाने की परियोजना शुरु करने पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि योजना शुरु हो जाने के बाद छह से सात वर्ष में बुलेट ट्रेन का परिचालन शुरु हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का तेजी से विकास हो रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेन्सियों ने भारत के तीव्र आर्थिक विकास की परिकल्पना की है। मोदी सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में महंगाई दर में भी गिरावट दर्ज की गयी है और अभी महंगाई दर गिरकर 5.23 प्रतिशत तक आ गया है। विदेशी निवेश बढ़ा है, आवास ऋण आठ से 10 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार वर्ष 2014 में 303 अरब डॉलर था जो अब बढ़कर 373 अरब डॉलर पहुंच गया है। वहीं बंबई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 22486 अंक से बढ़कर 30 हजार अंक के पार पहुंच चुका है। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 6400 अंक से बढ़कर 13 हजार अंक से ऊपर पहुंच चुका है।



श्री सिन्हा ने कहा कि उज्जवला योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है वहीं देश में अब यूरिया की कोई किल्लत नहीं है। इसके साथ ही पारदर्शी शासन के तहत विमुद्रीकरण, कालाधन को वापस लाने, स्पेक्ट्रम एवं कोयला ब्लाॅक की ई.निलामी समेत अन्य कार्य योजनाओं को अंजाम दिया गया है। रेल परियोजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में रेलवे में औसत निवेश 45 हजार करोड़ रुपये था जो अब बढ़कर एक लाख 25 हजार करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि झारखंड में वर्ष 2009 से 2013 तक रेल परियोजनाओं के लिए प्रतिवर्ष 500 करोड़ रुपये की राशि दी जा रही जिसे बढ़ाकर अब सालाना 2523 करोड़ रुपये कर दिया गया है। देश के 120 से अधिक स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध करा दी गयी है। उन्होंने कहा कि रांची डिविजन में भी यात्री सुविधाओं के विस्तार की योजना है। केंद्रीय मंत्री ने संचार सेवाओं के विस्तार का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2018 तक देश के प्रत्येक ग्राम पंचायत तक हाई स्पीड इंटरनेट की सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है और इसका 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वर्ष 2006-07 में सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) घाटे में आ गया था लेकिन इस वर्ष उसे 4000 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ होने की संभावना है। श्री सिन्हा ने धनबाद में भूमिगत से रेल लाइन के खतरे के संबंध में बताया कि इस संबंध में रेलवे के शीर्ष अधिकारी खनन मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में है। रेल सुरक्षा महत्वपूर्ण है लेकिन रेल यात्रियों को कोई परेशानी होए इसके लिए आवश्यक कदम उठाये जा रहे है। प्रधानमंत्री कार्यालय खुद सारी मॉनिटरिंग कर रहा है और जल्द ही रास्ता निकाल लिया जाएगा। उन्होंने ट्रेन की खराब बोगियों के संबंध में पूछे गये प्रश्न के उत्तर में कहा कि इस दिशा में भी चरणबद्ध तरीके से पुराने बोगियों को हटाने का काम चल रहा है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने धनबाद रेलमंडल के राजस्व योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कोयला और अन्य वजहों से यह रेलमंडल फायदेमंद रहा है लेकिन सभी क्षेत्रों के लोगों को रेल सुविधा का लाभ मिलें, इस दिशा में भी प्रयास किया जाना चाहिए।
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