नीतिगत दरें यथावत, ऋण सस्ता होने की उम्मीद नहीं

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मुंबई 07 जून, मानसून की चाल ,वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने के बाद के जोखिमों और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक ने अनुमान के अनुरूप नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया है जिससे घर,कार और व्यक्तिगत ऋण के सस्ता होने की उम्मीद लगाये लोगों को निराश होना पड़ा है। रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल ने मौद्रिक नीति समिति की दो दिवसीय बैठक के बाद आज चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक एवं रिण नीति जारी करते हुये सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुमान 0.10 प्रतिशत घटाकर 7.4 से 7.3 प्रतिशत कर दिया है। महंगाई के नरम रहने की उम्मीद जताते हुये पहली छमाही के दौरान इसके दो से साढे तीन प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान जताया गया है जबकि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इसके 3.5 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में रहने की संभावना है। रिजर्व बैंक के अनुमान की तुलना में अप्रैल माह में खुदरा महंगाई काफी नीचे रही। बैंक का अनुमान चार प्रतिशत था जबकि यह 2.99 प्रतिशत रही। रिजर्व बैंक गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) में से पांच ने रेपो दर को 6.25 प्रतिशत पर रखने के पक्ष में मत दिया जबकि डॉ रवींद्र एच ढोलकिया इसके विरोध में थे। रिवर्स रेपो रेट छह प्रतिशत और नगद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) चार प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर )में 50 आधार अंकों यानी 0.5 प्रतिशत कटौती करके इसे 20 प्रतिशत कर दिया है। नयी एसएलआर दर 24 जून से लागू होगी।

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