राष्ट्रपति चुनाव में हारी हुई लड़ाई लड़ रहीं सोनिया : सुशील

पटना 29 जून, बिहार भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)विधानमंडल दल के नेता एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार के नामांकन के दौरान घटक दल के तमाम बड़े नेताओं की अनुपस्थिति को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की हार बताया और कहा कि जिसे श्रीमती गांधी सैद्धांतिक बता रही हैं वह उनकी हारी हुई प्रतीकात्मक लड़ाई है। श्री मोदी ने आज यहां कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के नामांकन के समय घटक दल के तमाम बड़े नेता नदारद थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस हारी हुई प्रतिकात्मक लड़ाई को सैद्धांतिक बता रही है। पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार श्रीमती कुमार के नामांकन में पश्चिम बंगाल की मुख्मंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती से लेकर राष्ट्रीय लोक दल के चैधरी अजित सिंह तक शामिल नहीं हुए। भाजपा नेता ने कहा कि राजद अध्यक्ष श्री यादव ने तो नामांकन में अपनी पार्टी के दो कनिष्ठ मंत्री को भेज कर सिर्फ रस्म पूरा किया जबकि हजार करोड़ रुपये की बेनामी सम्पति के मामले में घिरे अपने पुत्र और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को बचाने के लिए पार्टी के दो बड़े नेताओं को केन्द्र सरकार के दो मंत्रियों से गुहार लगाने के लिए दिल्ली भेजा, जिन्हें मंत्रियों के इनकार के बाद निराशा हाथ लगी। श्री मोदी ने सवालिया लहजे में कहा कि यह कैसी सिद्धांत की लड़ाई है कि एक महीने के लिए विदेश में छुट्टी मनाने गए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी नामांकन में शामिल होने की फुर्सत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि चारा घोटाले में सजायाफ्ता राजद अध्यक्ष श्री यादव, शारदा चिटफंड मामले में घिरी ममता बनर्जी, अकूत बेनामी सम्पति की आरोपी मायावती और स्पैक्ट्रम घोटाला करने वाली पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम् (द्रमुक) के साथ गठबंधन बनाने के पीछे आखिर कौन सा सिद्धांत है। पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संप्रग उम्मीदवार मीरा कुमार कितनी सहिष्णु और लोकतांत्रिक हैं कि लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज को छह मिनट में 60 बार टोक कर भ्रष्टाचार पर बोलने नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि संप्रग के घटक दल के नेताओं ने भी हार सुनिश्चित मान कर कांग्रेस की इस कथित सै़द्धांतिक लड़ाई को गंभीरता से नहीं लिया है। 
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