गोरखालैंड आंदोलन की आग में जल रहा दार्जिलिंग, दो गोरखा समर्थकों की मौत

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दार्जिलिंग/कोलकाता 17 जून, पृथक गोरखालैंड आंदोलन को कलकत्ता उच्च न्यायालय की ओर से गैरकानूनी करार दिये जाने के बावजूद पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हिंसक घटनाएं थम नहीं रही और सुरक्षा बलों के साथ झड़प में आज दो गोरखा समर्थकों की मौत हो गयी जबकि इंडियन रिजर्ब बल (आईआरबी) के सहायक कमांडेंट किरन तमांग समेत कई सुरक्षाकर्मी एवं आम नागरिक घायल हो गये तथा पांच वाहनों एवं एक पुलिस चौकी में आग लगा दी गयी। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में दार्जिलिंग के 15 विकास मंडलों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के साथ बैठक के बाद राज्य सचिवालय में संयुक्त मीडिया कांफ्रेंस को संबोधित करते हुये दार्जिलिंग हिंसा काे पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े उग्रवाद से प्रेरित बताया और लोगों से हिल्स में शांति बहाल किये जाने की अपील की। प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षा बलों और गोरखा समर्थकों के बीच झड़प में दो गोरखाओं की मौत हो गयी। मृतकों की पहचान विमल शंकर और सुनील राय के रूप में की गयी है। शवों को दार्जिलिंग स्थित सैन्य अस्पताल में रखा गया है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा(जीजेएम) के सहायक सचिव विनय तमांग ने दावा कि पुलिस की गाेलीबारी में दो युवक भी मारे गये हैं, हालांकि सरकार ने इस दावे का खंडन किया है।श्री तमांग ने कहा , “ पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक दो लोगों की मौत हुई है तथा पांच अन्य घायल हुये हैं। हम अपने लापता महिला एवं पुरुष साथियों की तलाश कर रहे हैं।” दूसरी तरफ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनुज शर्मा ने कहा कि पुलिस ने गोलीबारी नहीं की बल्कि मोर्चा समर्थकों ने गोलियां चलाई और सुरक्षा कर्मियों पर बम फेंके। हिंसा की ताजा घटनाओं में आईआरबी के सहायक कमांडेंट गंभीर रूप से घायल हो गये। उन्हें सिलीगुड़ी के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा बहुत से सुरक्षा कर्मी और आम नागरिक भी घायल हुये हैं। गोरखा समर्थकों ने पांच वाहनों और पुलिस की एक चौकी में आग लगा दी। जीजेएम ने दो मृतक कार्यकर्ताओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और दावा किया कि वे पृथक राज्य आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले पहले शहीद हैं।

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