विशेष : मथुरा में आचमन लायक भी नही है यमुना का जल

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मथुरा, 04 जून, करोडो लोगों को जीने का साजोसामान मुहैया कराने वाली देश की प्रमुख नदियों में एक यमुना प्रदूषण के चलते कान्हानगरी मथुरा में अस्तित्व के संकट से गुजर रही है। कचरे और गिरते नालों ने यमुना का जल आचमन लायक भी नही रहा है। यमुना को स्वच्छ रखने के लिए लगभग तीन दशक से प्रयास किये गए। उच्च न्यायालय के आदेश से लेकर जन आंदोलन तक किये गए , जनमानस का दिल्ली कूच भी हुआ किंतु सभी प्रयास ‘ढाक के तीन पात’ ही साबित हुए। यह हाल तब है जब कि यमुना मथुरा की ’’जीवनरेखा’’ है। चतुर्वेद समाज का तो कोई कार्यक्रम बिना यमुना पूजन के अधूरा रहता है। चुनाव में नामांकन दाखिल करने के पहले सभी नेता यमुना पूजन करते हैं , मनोकामना पूरी करने के लिए समय समय पर चुनरी मनोरथ होता है मगर दिल्ली के कचरे और मथुरा के गिरते नालों ने यमुना का जल आज पीना तो छोड़ आचमन करने लायक भी नही रहा है। हिन्दू मान्यताआें अनुसार मोक्ष प्रदायिनी होने के कारण मथुरा में हर साल आनेवाले लगभग 25 करोड़ श्रद्धालुओं में से अधिकांश यमुना स्नान और यमुना जल पान करने का प्रयास करते हैं। यम की फांस से मुक्ति पाने के लिए यमद्वितीया पर तो देश के कोने कोने से लोग आकर अपनी बहनों के साथ विश्रामघाट पर यमुना में स्नान करते हैं। विश्वविख्यात द्वारकाधीश मंदिर के जन संपर्क अधिकारी राकेश चतुर्वेदी एडवोकेट ने बताया कि गुजरात के श्रद्धालु तो यहां यमुना में स्नान करने के बाद लोटी में यमुनाजल भरकर उसे सील कराकर गुजरात ले जाते हैं तथा एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन कर वे उस जल को खोलते हैं।


लगभग तीन दशक पहले मथुरा बार एसोसियेशन के पूर्व अध्यक्ष उमाकांत चतुर्वेदी के नेतृत्व में यमुना को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए आंदोलन चला जिसमें चतुर्वेद समाज की प्रमुख भूमिका थी जिसे तत्कालीन अधिकारियों ने झूठा आश्वासन देकर किसी प्रकार समाप्त करा दिया। इसके बाद प्रदेश सरकार के तत्कालीन मंत्री दयालकृष्ण एडवोकेट के प्रयास से यमुना को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए यमुना में नालों के गिरने से रोकने की प्रक्रिया शुरू हुई तथा नालों को टेप किया गया किंतु अधिकारियों ने इसमें भी खेल किया और सभी नाले टेप नही किये गए। नगरपालिका परिषद मथुरा के पूर्व अध्यक्ष श्यामसुन्दर उपाध्याय उर्फ बिट्टू ने बताया कि लगभग तीन दशक पूर्व गोकुल बैराज का निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी के कार्यकाल में शुरू हुआ तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासन में तत्कालीन मंत्री लाल जी टंडन ने इस आधे अधूरे बैराज का उद्घाटन भी कर दिया। कहा गया था कि गोकुल बैराज बनने से विश्राम घाट पर निर्मल जल मिलेगा मगर यमुना में नालों का गिरना न रूकने के कारण बैराज सीवर के तालाब में बदल गया। श्री उपाध्याय ने बताया कि इससे व्यथित होकर समाजसेवी गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने एक जनहित याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 1997 में दाखिल की थी।

वर्ष 1998 में न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय एवं न्यायमूर्ति के डी साही की पीठ ने न केवल उसे स्वीकार किया बल्कि उस समय आदेश देकर यमुना में कारखानों के कचरा, सीवर का पानी, कट्टीखाने के खून आदि के गिरने पर रोक लगा दी थी। पूर्व सोलिसिटर जनरल ए0डी0 गिरि के नेतृत्व में एक निगरानी समिति भी बना दी थी जो यहां पर समय समय पर आकर यह देखती थी कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कहीं कोताही तो नही हो रही है। जब तक यह समिति मथुरा आती रही तब तक उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन किया गया मगर लगभग छह साल पहले ए0डी0 गिरि के निधन के बाद स्थिति जस की तस हो गई। हालांकि उच्च न्यायालय के आदेश के तहत यमुना कार्ययोजना के अंतर्गत यमुना को प्रद्दूषण से मुक्त रखने के लिए एक अपर जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी को भी नोडल अधिकारी के रूप में लगाया किंतु नगरपालिका से लेकर जल निगम और उ0प्र0 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अन्य विभागों की ढिलाई और असहयोग से यमुना नाले में बदल गई है। उन्होने कहा कि यमुना की दुर्दशा ने ब्रज के महान संत रमेश बाबा को विचलित किया और उनके आशीर्वाद से उनके शिष्य जयकृष्णदास ने नागरिकों के सहयोग से दिल्ली कूच किया मगर दिल्ली पहुंचने के पहले ही तत्कालीन संप्रग सरकार के प्रतिनिधियों से उनकी वार्ता सन 2013 में हुई और मंत्रियों के आश्वासन को लेकर वे वापस चले आए किंतु उसके बाद कुछ भी नही हुआ। श्री उपाध्याय ने कहा कि इससे क्षुब्ध होकर सन 2015 में ब्रज के महान संत रमेश बाबा के नेतृत्व में यमुना मुक्तिकरण अभियान के तहत दिल्ली कूच हुआ तो केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद प्रधानमंत्री का संदेश लेकर आंदोलनकारियों के पास आए और उनकी यमुना के जल प्रवाह को किसी भी प्रांत द्वारा न रोकने एवं समानान्तर नाला बनाकर सीवर का पानी उसमें डालकर और फिर उसे शुद्ध कर खेती में प्रयोग करने की मांग पूरी कर ली और दो माह में काम शुरू करने का भरोसा दिलाया पर दो साल बीत जाने के बावजूद कुछ न हुआ।


उन्होंने कहा कि यमुना को शुद्ध करने के केन्द्रीय मंत्री उमा भारती के बयान भी अभी तक बयान ही बने हुए हैं। उन्होंने अपने मंत्रालय की ओर से वृन्दावन में एक कार्यक्रम कराकर यमुना को शुद्ध कराने का वायदा भी किया था किंतु उस दिशा में भी कोई कार्य नही हुआ। यमुना मुक्तिकरण अभियान के संयोजक राधाकांत ने बताया कि हाल में सत रमेश बाबा का आशीर्वाद लेने के लिए उ0्रप्र0 सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा आए थे । बाबा द्वारा यमुना की दुर्दशा की चर्चा करने पर उन्होंने बाबा से कहा था कि 9 जून से 14 जून के बीच में लखनऊ में बुलाकर बाबा के प्रतिनिधियों से यमुना प्रद्दूषण दूर करने केे संबंध में प्रदेंश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता कराएंगे। संयोजक राधाकांत ने बताया कि फिलहाल उनकी समिति इसका ही इंतजार कर रही है अन्यथा की स्थिति में आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
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