सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए आयुष रंजन

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन)  हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में, हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए। हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य हस्ताक्षर, कवि व गजलकार दुष्यंत कुमार की उपरोक्त पंक्तियाँ मनुष्य के व्यक्तित्च, उसकी दूरदर्शी सोंच, उसके उद्देश्श्य व लक्ष्य को पूरी तरह प्रदर्शित करती है। आप चाहे जहाँ कहीं भी हों, जिस भी परिस्थिति से जूझ रहे हों, जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित कर समर्पित भाव से यदि आगे बढ़ते रहने की जीजीविषा मन में हो तो फिर मंजिलें मिल ही जाती हैं। बचपन से ही हीपाॅप डांस, ड्रामा, फिल्म, थियेटर को अपनी जिन्दगी का अहम हिस्सा बना चुका आयुष रंजन अपनी मंजिल की ओर लगातार अग्रसर है। पेशे से अधिवक्ता धर्मेन्द्र कुमार के इस लड़के में गजब की हुनर है। बचपन से ही फिल्म, डांस, ड्रामा मंे महारत हासिल आयुष जल्द ही 7 ऐ जे वल्र्ड इंटरटेनमेंट कम्बाइंड विद फलाइंग हाॅर्स प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनने वाली फिल्म दिल्ली लाईव में दिखने वाला है। उप राजधानी दुमका में सिविल मामलों के विख्यात अधिवक्ता व नाना जी स्व0 ब्रजभूषण प्रसाद के डंगालपाड़ा स्थित आवास में कलाकार आयुष रंजन से मुखातिब होने का अवसर प्राप्त हुआ। मात्र 15-16 वर्ष की उम्र में ही डांस की विभिन्न विद्याओं में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों को प्राप्त कर चुका आयुष रंजन ने कहा दिल्ली लाईव फिल्म के डायरेक्टर रवि सिकंदर आनंद हैं जबकि इसके प्रोड्यूसर हैं विनय आनंद व रवि सिकंदर आनन्द। इस फिल्म के संभावित मुख्य कलाकारों में रणवीर कपूर व सन्नी दैयोल होंगे। सौ कलाकारों की एक टीम अगले कुछ दिनों के अन्दर ही फिल्म की सूटिंग के लिये निकल पड़ेगी। मल्टी स्टारर हाई बजट बाॅलीबुड फिल्म दिल्ली लाईव की आॅफिसियली लांचिंग प्रसिद्ध अभिनेत्री रविणा टंडन ने 07 फरवरी 2015 को किया था। थैंक्स ए लाॅट, सेंसलेस, सिंस लव व नाईवर फोरइवर जैसी फिल्में बनाये जाने की योजना पर भी उपरोक्त प्रोडक्शन हाउस द्वारा कार्य किया जा रहा है। आयुष रंजन के चाचा जी दुमका में सिनियर जर्नलिस्ट हैं। गिरिडीह (झारखण्ड) का रहने वाला आयुष रंजन डंगालपाड़ा स्थित अपने नानी-नाना जी व जर्नलिस्ट चाचा से एक लम्बी अवधि बाद मुलाकात हेतु पहुँचा हुआ है। आयुष रंजन का कहना है हिम्मते मर्दां, मर्द ए खुदा। यदि हिम्मत हो, व्यक्ति कर्मशील हो और जिस भी काम के प्रति पूरी निष्ठाभाव से समर्पित हो, सफलताएँ अवश्य ही उसके कदम चूमेंगी। यह दिगर बात है कि जीवन में संघर्षों को अपना मित्र बनाना होगा और पूरा का पूरा वक्त पूरी इमानदारी से अपने काम में लगाना होगा। आयुष रंजन ने कहा जो लोग संघर्षपथ पर पूरी निष्ठा के साथ चलते हैं मंजिल उन्हें अवश्य मिलती है। अपने हमउम्र बच्चों के संबोधन में कलाकार आयुष रंजन ने कहा पूरी निष्ठा से वे अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हों, इसी मंे सफलताएँ छिपी है जो निश्चित रुप से मेहनतकश इंसानों को प्राप्त होता है। कलाकार आयुष  रंजन कुछ दिनों के बाद वापस दिल्ली की ओर चला जाएगा। 

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