बिहार : 6-7 जुलाई को ऐपवा द्वारा राष्ट्रीयव्यापी प्रतिवाद

  • ताजा घटनाक्रम में दलित समुदाय से आने वाली ऐपवा व माले नेत्री जीरा भारती पर किया गया है बर्बर सामंती हमला: मीना तिवारी
  • यूपी में संविधान की लगातार उड़ायी जा रही धज्जियां, दलित-अल्पसंख्यक और महिलायें खास निशाने पर.
  • बनारस में भाकपा-माले कार्यालय पर छापेमारी और लखनऊ में दलित उत्पीड़न के सवाल पर आयोजित प्रेस कांफ्रेस को संबोधित करने वाले बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी दे रही फासीवाद की आहट.


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पटना 4 जुलाई, ऐपवा की महासचिव व भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी की सदस्य मीना तिवारी ने कहा है कि यूपी में जब से योगी की सरकार आई है, संविधान व लोकतंत्र की लगातार धज्जियां उड़ायी जा रही हैं. सामंती-अपराधियों का मनोबल आसमान छू रहा है और सहारनपुर से लेकर मिर्जापुर तक दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों पर बर्बर किस्म के हमले की बाढ़ सी आ गयी है. सबसे हालिया घटनाक्रम में मिर्जापुर जिले में ऐपवा व माले की नेता जीरा भारती पर बर्बर तरीके से सामंती-दबंगों ने हमला किया. 3 जुलाई की शाम को जब वे मिर्जापुर प्रखंड कार्यालय से  अपने गांव रिक्सा खुर्द लौट रही थीं, सामंती ताकतों ने उनके ऊपर बर्बरता से हमला किया, उनकी साड़ी खोलकर उन्हें निर्वस्त्र करने की कोशिश की और उन्हें जमीन पर गिरा दिया. उन्हें लात-घूंसों से मार कर अधमरा कर दिया. उनके साथ उनका 14 वर्ष का बेटा भी था. दलित समुदाय से आने वाली जीरा भारती 2014 में भाकपा-माले की ओर से लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं और इलाके की जबरदस्त नेता हैं. पिछले समय में उन्होंने अपने इलाके में मजदूरी के सवाल पर जबरदस्त आंदोलन का नेतृत्व किया था. जिसके दबाव में प्रशासन को मजदूरी की दर बढ़ाकर 100 रु. करनी पड़ी थी. सामंती ताकतें इसी से खार खाए बैठी थीं. योगी राज में इनका मनोबल बढ़ा और इस तरह की शर्मनाक घटना सामने आई. इस बर्बर हमले के खिलाफ आगामी 6-7 जुलाई को ऐपवा द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिवाद किया जाएगा.

उन्होंने आगे कहा कि इसके पूर्व बनारस में भाकपा-माले कार्यालय पर छापेमारी की गयी, जो यह साबित करता है कि जोगी राज में लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे प्रतिवाद को भी सरकार दबाने पर पूरी तरह आमदा है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दलितों के सवालों को लेकर यूपी प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने वाले बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी भी बेहद निंदनीय है. पुलिस ने घुस कर प्रोफेसर रमेश दीक्षित, पूर्वपुलिस अधिकारी एस.आर.दारापुरी, रामकुमार , आषीश अवस्थी, पी एस कुरील को गिरफ्तार कर लिया है. यह लोकतंन्त्र के मुँह पर कालिख है और इसका हर स्तर पर विरोध किया जाना चाहिए. यह संवाददाता सम्मेलन गुजरात से आ रहे कुछ दलित संगठनों की गिरफ्तारी के विरोध में किया गया था. इसके पूर्व आइसा नेताओं पर भी यूपी में बर्बर तरीके से दमन ढाया गया था और लोकतांत्रिक प्रतिवाद करने पर कई छात्र नेताओं को जेल में ठूंस दिया गया था.

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