दुमका : तीन दिवसीय आनन्द मार्ग योग सेमिनार का हुआ समापन

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ननकू कुरुवा, दुमका में तीन दिवसीय आनन्दमार्ग योग सेमिनार सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। आनन्दमार्ग स्कूल में आयोजित इस तीन दिवसीय सेमिनार के मुख्य अतिथि आचार्य तन्मयानन्द अवधूत ने बच्चों के बीच योग के विभिन्न आसनों/ आयामों की जानकारी देते हुए कहा कि योग हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। आत्मा की मुक्ति, योगासन, बीमारियों के बारे में लोगों को जागरुक करना, जगत के हितार्थ तीन हजार स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा, दो हजार अनाथ आश्रमों का संचालन, हाॅस्पीटल, मेडिकल कैम्प के माध्यम से लोगों की सेवाएँ आनन्दमार्ग का मुख्य उद्देश्य है। उड़ीसा  में रिलिफ के लिये बीजू पटनायक अवार्ड, बंग्लादेश व नेपाल की आपदाओं में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने तथा लोगों की सेवाओं के आलोक में आनन्दमार्ग को कई राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं। हैती जैसे देश में आनन्दमार्ग की टीम ने आपदाओं में बढ़-चढ़ कर काम किया है। आनन्दमार्ग संस्था सामाजिक व अर्थनीति दर्शन को प्रमुखता के साथ समाज में फैलाने का काम कर रही है। पूरे भारतवर्ष में दो हजार व पूरे विश्व में तकरीबन 4 से 5 हजार आनन्दमार्गी सन्यासी अपने उद्देश्यों का प्रचार कर रही है। आनन्दमार्ग संस्था का नारा है-मानव जन्म साधना के लिये, मानव-मानव भाई-भाई, सभी मनुष्यों का धर्म एक, मानव समाज अविभाज्य है, सदविप्र समाज कायम हो, विश्वबन्धुत्व के आधार पर विश्व सरकार गठित हो, श्री श्री आनन्दमूर्ति जी का युगान्तकारी विप्लवी व सर्वात्मक कल्याणकारी सामाजिक-अर्थनैतिक प्रउत दर्शन विश्व में स्थापित हो। आज से सात हजार वर्ष योग की शुरुआत ऋषि-मुनियों ने की थी। आनन्दमार्ग के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1955 में आनन्दमार्ग की स्थापना प्रभात रंजन सरकार ने की थी। इसकी स्थापना जमालपुर (मुंगेर) में हुई थी। भारत सहित विश्व के कुल 182 देशों में आनन्दमार्ग अपना काम कर रही है। जिला भुक्ति प्रधान मानिक चंद्र ने कहा कि कोलकाता रिजन में तीन डायसिस काम करते हैं। बर्द्धमान, दुमका व हुगली। यह तीन दिवसीय सेमिनार पूरे भारतवर्ष में एक साथ आयोजित किया गया है। 

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