दुमका : छोटी-बड़ी दूकानों से सजा पड़ा है बाबा का दरबार

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) फौजदारी बाबा बासुकिनाथ महादेव का दरबार जहाँ एक ओर गेरुवावस्त्रधारियों से चारों ओर पटा हुआ है वहीं दूसरी ओर पूरा मेला परिसर व बाहरी क्षेत्र सैकड़ों अलग-अलग आईटमों की खरीद-बिक्री से बमबम है। झारखण्ड, बिहार, बंगाल, यूपी, एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, गुजरात व अन्य राज्यों सहित केन्द्र शासित प्रदेशांे के साथ-साथ देश के बाहर नेपाल, भूटान, तिब्बत, मारीशस, फिजी, सुरीनाम, नेपाल व बंग्लादेश के हिन्दू धर्मावलम्बी प्रतिदिन हजारों की संख्या में बाबा बैद्यनाथ व बासुकिनाथ पर जलार्पण को आते हैं। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के लिए नंदी चैक से लेकर बाबा के दरबार तक छोटी-मोटी दूकानें खोली गई हैं। सावन माह में पूर  तीस दिनों तक वासुकिनाथ धाम दुल्हन की भांति सजा दिखता है। मेला के दौरान स्थानीय दूकानों से शंखा-चूड़ी से लेकर आलता-बिंदी तक तथा काँसा, चाँदी-तांबा, पीतल, अल्मुनियिम खूब खरीददारी होती है। चप्पल की दुकान से लेकर पूजा प्रसाद तक सभी दुकाने केसरिया रंग से भरा दिखता है या ये कहें कि पूरे बाजार में ही केसरिया रंग का सैलाब आ जाता है। जगह-जगह भूट्टा, सूप, डलिया, अचार श्रद्धालुओं के लिए होटल, छोटे-छोटे बर्तन, तलवार, कैसट रिकाॅर्डिंग और अजीबो गरीब चीजें हरे-हरे चुड़ी, खिलौने, रंग विरंगी लाइट एक विषेष प्रकार की अनुभूति कराती जिसको वर्णन नहीं किया जा सकता। जलार्पण के बाद श्रद्धालुआंे की इतनी भीड़ रहती हैं कि 5 मिनट के रास्ते को 20 मिनट में तय किया जाता है बोलबम और साइड बम से पूरा वासुकिनाथधाम गुंजायमान रहता है। श्रद्धालुओं को तकलीफ न हो इस वजह से सभी दुकानें सड़क के किनारे लगायी गयी है। दुकाने कुछ नाम मात्र के ही स्थानीय लोगों द्वारा लगाया जाता है प्रायः सभी दुकान बाहर से लोग आकर लगाते है एवं श्रद्धालु की सेवा करते है। दुकानदार बताते है पूरे एक महीना वासुकिनाथधाम या बाबा के दरबार में आकर दुकान लगाने से बचे 11 महीने हमारी दुकानदारी ठीक रहती है। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले श्रद्धालु बाबा के भक्त हैं और सभी अच्छे होते हैं। हम उनकी सेवा करते हैं एवं हर वर्ष उन्हें यहां आने का निमंत्रण भी देते हैं।

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