संत का इशारा समझा और बदल लिया जीवन

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पूना - 27 जुलाई, कहते हैं कि व्यक्ति में अगर जीवन-परिर्वतन की गुंजाइष हो तो उसे वक्त नहीं लगता। मात्र स्थान व समय निष्चित होता है कि अब वह बदलने वाला है पर बदलाव लाने में कोई ना कोई सहयोगी अवष्य बनता है। जी हाँ! पूना शहर के कात्रज स्थित ‘आनंद दरबार’ में श्रमण संघीय सलाहकार दिनेष मुनि, डाॅ. द्वीपेन्द्रमुनि और श्रमण डाॅ. पुष्पेन्द्र की दैनिक चातुर्मासिक प्रवचन-शृंखला गतिमान है। 23 जुलाई 2017 रविवार को सलाहकारप्रवर के सान्निध्य में ‘आचार्य आनंद कार्यक्षम पत्रकार पुरस्कार’ समारोह आयोजित था। समारोह में पत्रकार श्री बजरंग निंबालकर भी सम्मानित हुए।  जब वे मुनिश्री के पास आषीर्वाद लेने आए, तब श्री दिनेष मुनि ने इषारे में उनको पूछा कि क्या आप मांसाहार करते हैं? 


पत्रकार बंधु ने तत्काल जवाब दिया - ‘‘हाँ गुरुदेव!’’ 
मुनिश्री ने मात्र इषारे में ही कहा कि छोड़ दीजिये। 

बजरंगजी ने मुनिश्री के संकेत को सकारात्मक लिया और तुरन्त बोले - ‘‘गुरुदेव! आज से त्याग करता हूँ।’’ गुरुदेवश्री ने उनको नवकार मंत्र सुनाते हुए इष्टदेव की साक्षी से आजीवन मांसाहार-त्याग की प्रतिज्ञा करवाई। बजरंगजी को तो एक नहीं, दो-दो पुरस्कार मिल गये। उनके हृदय-परिवर्तन की साक्षी धर्मसभा में उपस्थित नर-नारी ‘हर्ष-हर्ष, जय-जय’ बोल उठे। सभा में उनकी पत्नी व पुत्र भी थे, वे भी हर्ष से पुलकित हो उठे। बीस वर्षों तक सेना में रहकर देषसेवा करने वाले बजरंगजी पिछले सात वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मन की सच्चाई और सत्संकल्प का यह प्रेरक प्रसंग उनकी पत्रकारिता को नई दीप्ति प्रदान करता रहेगा। इससे पूर्व मनपा पूना नगरसेवक युवराज बेलदरे जब अपने जन्मदिवस पर आर्षीवाद प्राप्त करने आए तो सलाहकार दिनेष मुनि के कहने पर उन्होंने भी एक वर्ष तक मांसाहार त्यागने का निष्चय किया। संघपति बालासाहेब धोका ने इस अवसर पर श्री बजरंग जी का स्वागत अभिनंदन किया।

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