व्यक्तिगत भ्रष्टाचार से बड़ा सवाल बिहार जनोदश 2015 के सम्मान का : भाकपा माले

  • व्यक्तिगत भ्रष्टाचार से बड़ा सवाल बिहार जनोदश 2015 के सम्मान का है, अपने वर्तमान कार्यकाल में हुए शैक्षणिक व अन्य घोटालों का जवाब दे नीतीश सरकार: दीपंकर भट्टाचार्य
  • बाबरी मस्जिद विध्वंस के मामले में चार्जशीटेड केंद्रीय मंत्री उमा भारती, कई संगीन अपराधों के आरोपी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सवाल पर भाजपा क्यों है चुप?
  • बिहारशरीफ में प्रशासन का दिखा दुहरा चरित्र, बजरंग दल को मार्च की अनुमति तो ‘अमन मार्च’ निकाल रहे लोगों पर किया गया बर्बर पुलिसिया दमन.
  • शराबबंदी की आड़ में गरीबों पर ढाया जा रहा जुल्म, जहानाबाद के मुसहर समुदाय से आने वाले दो दिहाड़ी मजदूरों को सुनाई गयी सजा.
  • भूमि अधिकार आंदोलन का तीसरा चरण 9 से 15 अगस्त तक, 31 जुलाई को विधानसभा के समक्ष होगा धरना.


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पटना 19 जुलाई, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर सीबीआई द्वारा 2004 में घटित कथित भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज किया गया है और उसकी जांच होनी चाहिए. लेकिन इस व्यक्तिगत भ्रष्टाचार से ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल नीतीश सरकार के वर्तमान शासन में हुए संस्थागत व सिलसिलेवार शैक्षणिक भ्रष्टाचार व अन्य घोटालों और लोगों की जिंदगी की मूल समस्याओं का है. यदि एक समय में चारा घोटाला बिहार में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना और उसकी वजह से तत्कालीन मुख्यमंत्री को अपने पद से हटना पड़ा, तो आज बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे इन संस्थागत घोटालों की जवाबदेही नीतीश कुमार को लेनी होगी. टाॅपर के बाद बीएसएससी घोटाला, इस वर्ष इंटरमीडिएट परीक्षाफल में हुई व्यापक धांधली, राशन घोटाला, एससी-एसटी छात्रों के नाम पर फर्जी तरीके से करोड़ों की निकासी आदि विषय पर बिहार की जनता ने लगातार आंदोलन चलाया है और उसकी सीबीआई जांच की मांग की है, लेकिन नीतीश कुमार ने इन घोटालों की जांच पर आज तक एक शब्द तक नहीं कहा है. इन शैक्षणिक घोटालों ने बिहार की शिक्षा और युवाओं के भविष्य को और बदतरीन स्थिति में ढकेल दिया है. कई मामलों में भाजपा का पक्ष लेकर भी नीतीश कुमार जनोदश का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं.

भाजपा इन मामलों में लगातार दुहरा स्टैंड अपना रही है. बाबरी मस्जिद विध्वंस में चार्जशीटेड उमा भारती के सवाल पर वह बिलकुल खामोश है. दंगा-हत्या-अपहरण जैसे कई गंभीर आरोपों में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्या का नाम आ रहा है. यहां तक कि आज योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा चलाने के लिए आदेश निर्गत करने का फाइल मुख्यमंत्री के ही टेबुल पर पड़ा हुआ है. ऐसे में भाजपा को जवाब देना चाहिए कि गंभीर आपराधिक कार्रवाइयों में लिप्त अपने केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों को वह क्यों बचा रही है? जाहिर है कि भाजपा का भ्रष्टाचार से लड़ने दावा पूरी तरह खोखला और अपनी राजनीतिक विरोधियों को दबाने का एक जरिया मात्र बनकर रह गया है. बिहारशरीफ में पिछले 17 जुलाई को इंसाफ मंच के बैनर से आयोजित ‘अमन मार्च’ पर प्रशासन ने बर्बरता से लाठीचार्ज किया, यह पूरी तरह लोकतंत्र विरोधी कार्रवाई है और हमारी पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है. कार्यक्रम के एक घंटा पहले कार्यक्रम की अनुमति प्रदान नहीं करने का पत्र जारी किया गया, जबकि उस वक्त तक कार्यक्रम में सैकड़ो लोग शामिल हो चुके थे. आज प्रशासन कह रहा है कि इंसाफ मंच एक संदेहास्पद संगठन है और उसके नाम पर उपद्रवी लोग मार्च में शामिल थे. यदि ऐसा था तो प्रशासन ने एक घंटे तक सभा क्यों आयोजित होने दी? दरअसल, 20-25 मुस्लिम नवयुवकों को प्रशासन ने अलग से गिरफ्तार कर लिया था, जिन्हें लोग छोड़ने की मांग कर रहे थे. लेकिन प्रशासन ने इसके उलट उनपर बर्बरता से लाठीचार्ज किया और कई लोगों को जेल में डाल दिया. इसी प्रशासन ने कुछ दिन पहले बिहारशरीफ शहर में बजरंग दल को मार्च करने की अनुमति प्रदान की थी. प्रशासन का दुहरा चरित्र साफ दिख रहा है. अमन मार्च कर रहे लोग ‘भीड़ द्वारा की जा रही हत्या’ और अमरनाथ आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकजुट हुए थे. ऐसे में उनके मार्च से कौन सी शांति भंग हो रही थी? इंसाफ मंच लंबे समय से मुजफ्फरपुर से लेकर पूरे बिहार में दमन-उत्पीड़न के शिकार दलितों-अकलियतों के न्याय के लिए लड़ने वाला मंच रहा है, जिसका राज्यस्तरीय ढांचा है. भाकपा-माले विधायक दल के नेता काॅ. महबूब आलम और केंद्रीय कमिटी सदस्य काॅ. सरोज चैबे के नेतृत्व में एक जांच टीम ने कल बिहारशरीफ का दौरा करके घटना का जायजा लिया.


बिहार का डैªकोनियन शराबबंदी कानून गरीबों पर कहर बनकर टूटा है. शराब पीने के जुर्म में जहानाबाद के पूर्वी ऊंटा के मुसहर समुदाय के दो भाइयों मस्तान मांझी व पेंटर मांझी को 29 मई 2017 को गिरफ्तार किया गया और मात्र एक महीने के अंदर 5 साल सश्रम कारावास और 1 लाख का जुर्माना सुना दिया गया है. शराबबंदी कानून के तहत अब तक तकरीबन 44 हजार लोगों को जेल में डाल दिया गया है. इस तरह यह कानूनी पूरी तरह गरीबों को दबाने और उनको उत्पीड़ित करने के लिए ही लाया गया है. बिहार में शराब की होम डिलीवरी बखूबी जारी है, लेकिन इसकी मार गरीबों को खानी पड़ रही है और गरीबों के लिए काला कानून साबित हो रहा है. ठीक उसी तरह ‘स्वच्छता’ के नाम पर दलितों-अकलियतों को ही प्रताड़ित किया जा रहा है. अभी हाल में राजस्थान में शौच के दौरान महिलाओं की वीडियोग्राफी का विरोध करने पर हमारी पार्टी के नेता काॅ. जफर हुसैन की हत्या कर दी गयी.  बिहार में पिछले दिनों भूमि अधिकार आंदोलन चला. इसका तीसरा चरण आगामी 9 अगस्त से 15 अगस्त तक चलेगा. 16 जुलाई को भूमि के सवाल पर मोतिहारी में आयोजित भूमि अधिकार कन्वेंशन में यह तय किया गया. आगामी 31 जुलाई को भूमि के सवाल और मोतिहारी चीनी मिल के मजदूर-किसानों के बकाये के भुगतान के सवाल पर विधानसभा के समक्ष धरना दिया जाएगा.
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