जी-20 बैठक: निगाहें मोदी -जिनपिंग की मुलाकात पर

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नयी दिल्ली 06 जुलाई, जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में कल से हो रहे जी-20 की शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन , आतंकवाद और आर्थिक विकास जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा के लिये विश्व के बड़े नेता पहुंच रहे हैं लेकिन सिक्किम सीमा विवाद को देखते हुये देश की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर होगी जिनका ब्रिक्स नेताओं की बैठक में आमना सामना होगा, श्री मोदी इस समय इजरायल की यात्रा पर हैं और वह वहीं से आज रात हैम्बर्ग रवाना हो जायेंगे। जी 20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा वह जर्मन चांसलर एंगेल मार्कल तथा अन्य नेताओं के साथ मुलाकात करेंगे। सिक्किम सीमा पर विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच चल रही तनातनी को देखते हुये सबकी नजर श्री मोदी और श्री जिनपिंग पर होगी। दो दिनाें में श्री मोदी अर्जेंटीना, कनाडा, इटली, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और वियतनाम के नेताआें के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार दो दिन के जी-20 शिखर सम्मेलन का थीम “शेपिंग दि इंटरकनेक्टेड वर्ल्ड” है। सम्मेलन के पहले दिन जी-20 नेताओं के बीच दो घंटे से अधिक लंबी अनौपारिक बैठक में आतंकवाद पर रोक लगाने को लेकर गहन विचार मंथन होगा। यह दूसरा मौका होगा जब विश्व नेताओं के बीच आतंकवाद से मुकाबले को लेकर खुली एवं गहन चर्चा होगी। श्री मोदी आतंकवाद के खात्मे के लिये विश्व नेताओं को ठाेस कदम उठाने को उत्प्रेरित करेंगे। इससे पहले तुर्की के अंतालिया में पिछली जी-20 बैठक में भी इस बारे में चर्चा हुई थी। सूत्रों ने बताया कि सात जुलाई को ‘लीडर्स रिट्रीट’ वाले दिन ब्राजील,रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं की एक बैठक होगी। इस बैठक में सबसे अहम मौजूदगी रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की होगी। इस दौरान भारत एवं चीन के बीच सिक्किम सीमा को लेकर बढ़े तनाव को दूर करने के बारे में भी बात हो सकती है। समझा जाता है कि सिक्किम में भारत ,भूटान एवं चीन के संयुक्त सीमा क्षेत्र दोकालम पठार में चीनी सेना द्वारा एकतरफा सड़क निर्माण की कोशिश और भूटान एवं भारत की सेना द्वारा इसका विरोध किये जाने से जाे गतिरोध बना है, उसे दूर करने में रूस की ओर से कोई पहल हुई है। सीमा पर इस विवाद के बीच भारत एवं चीन दोनों की ओर से उत्तेजक बयान दिये गये हैं जिनमें 1962 के युद्ध की यादों का भी उल्लेख किया गया है। सूत्रों के अनुसार जी 20 सम्मेलन के दूसरे चरण में चार सत्र होंगे जिनमें आर्थिक वृद्धि, व्यापार, साझेदारी पर विचार विमर्श होगा। नीति आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया और वित्त सचिव अशोक लवासा मैक्रो इकॉनोमिक पॉलिसी, मुद्रा विनिमय, राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियों, जलवायु एवं हरित वित्तपोषण पर भारत का पक्ष रखेंगे। जी-20 की बैठक में चीन द्वारा ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल को प्रोत्साहित किये जाने की संभावना और उस पर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर एक सवाल के जवाब में सूत्रों ने साफ किया कि जी-20 की शिखर बैठक की तैयारियों के लिये शेरपा स्तर की बैठकों में इस विषय पर कोई बात नहीं हुई है इसलिये शिखर बैठक में भी ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल के बारे में कोई बात होने की संभावना नहीं है। जी-20 शिखर सम्मेलन में उत्तर कोरिया संकट और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों के छाए रहने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने ऐतिहासिक पेरिस करार से हटने की घोषणा की थी। इसके बाद जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयास के कमजोर होने की आशंका गहरा गई है। इसके अलावा मंगलवार को उत्तर कोरिया ने पहले अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर अमेरिका समेत पूरी दुनिया की सिरदर्दी और बढ़ा दी है। जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान सबकी नजरें श्री ट्रंप पर होंगी जो उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को हर हाल में रोकना चाहते हैं। इसके लिए वह चीन पर लगातार दबाव भी बना रहे हैं। इसके अलावा श्री ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच पहली द्विपक्षीय बैठक पर भी दुनिया की निगाहें हाेंगी। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच चल रही है। श्री ट्रंप के कई करीबी सहयोगियों को इस कारण इस्तीफा देना पड़ा है। व्यापार के क्षेत्र में श्री ट्रंप की संरक्षणवाद की नीति का मुद्दा भी उठने की संभावना है। चीनी राष्ट्रपति और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच मुलाकात भी होगी। इसके अलावा सीरिया और यूक्रेन से जुड़े मसले भी उठ सकते हैं।

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