बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने की हो पूरी तैयारी : नीतीश

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पटना 30 जून, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ जैसी विभीषिका से निपटने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुये आज कहा कि दोनों ही स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तैयारी की जानी चाहिए। श्री कुमार ने यहां बाढ़ पूर्व तैयारियों के लिए सभी प्रमण्डल एवं जिलों के वरीय अधिकारियों से विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये समीक्षा बैठक की। बैठक में संभावित बाढ़ 2017 एवं सुखाड़ की स्थिति से पूर्व की तैयारी के विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की गयी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विडियो कांन्फ्रेंसिंग से जुड़े अधिकारियों कई को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये। मुख्यमंत्री ने कहा, “बाढ़ एवं सुखाड़ दोनों के लिये पूरी तैयारी रखनी चाहिये। सुखाड़ की स्थिति में डीजल अनुदान, नहरों में पानी अंतिम छोर तक पहुंचे, सभी ट्यूबवेल कार्यरत हों, बिजली की पर्याप्त आपूर्ति हो, आकस्मिक फसल योजना का लाभ लोगों तक पहुंचे, इसे देखना होगा।” उन्होंने कहा कि आकस्मिक फसल योजना के संबंध में कृषि विभाग को निरंतर समीक्षा करनी होगी ताकि लोगों को अधिक से अधिक सहूलियत मिल सके।


श्री कुमार ने कहा कि बिहार में बाढ़ पड़ोसी देश नेपाल के साथ ही उत्तराखंड एवं मध्य प्रदेश में वर्षा होने से भी आती है। वर्ष 2007 में सर्वाधिक प्रलयंकारी बाढ़ आई थी। बाढ़ से 22 जिले एवं ढाई करोड़ की आबादी प्रभावित हुई थी। यह बाढ़ कोई प्रमुख नदी में नहीं बल्कि बूढ़ी गंडक नदी में आयी थी। कब कहां से नुकसान होगा, पता नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में वर्षा कम हो या ज्यादा, बाढ़ आ सकती है। उन्होंने कहा कि संभावित बाढ़ के पूर्व की पूरी तैयारी में मुस्तैदी दिखानी होगी। कम बारिश होने की स्थिति में भी सुखाड़ होने की भी पूरी तैयारी रखने की जरूरत है। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री के समक्ष बाढ़ पूर्व तैयारी से संबंधित पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया। इसमें बाढ़ की स्थिति में संसाधन मानचित्र पर चर्चा की गयी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की प्रिपोजिशनिंग कर ली गयी है। चर्चा के क्रम में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि नाविकों को प्रशिक्षण एवं उनका उन्मुखीकरण अनिवार्य रूप से कराया जाये। 

श्री अमृत ने बताया कि बैठक में राहत सामग्रियों की जिलावार निविदा एवं क्रय की स्थिति की भी समीक्षा की गयी। इस पर श्री कुमार ने निर्देश दिया कि प्रदेश के जिन जिलों में दर निर्धारित नहीं हुई है, वहां जल्द ही दर निर्धारित कर लिया जाये। इसके अलावा समीक्षा में बाढ़ शरण स्थलों की पहचान, जिला टास्क फोर्स का गठन, बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली, तटबंधों की स्थिति, पथों की स्थिति के संबंध में विस्तृत रूप से चर्चा की गयी। समीक्षा के क्रम में कृषि विभाग द्वारा कृषि से संबंधित विभिन्न पहलुओं, वर्षापात, खरीफ फसल आच्छादन, आकस्मिक फसल योजना, डीजल अनुदान के संबंध में मुख्यमंत्री के समक्ष विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। श्री कुमार को यह भी जानकारी दी गयी कि सभी जिलों में पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष अबतक कम वर्षा हुयी है। जून माह में होने वाली वर्षा गत तीस वर्षों के औसत से कम है। बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा ऋतुकालीन वर्षा से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव, ऊर्जा मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, कृषि मंत्री रामविचार राय, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री अवधेश कुमार सिंह, आपदा प्रबंधन मंत्री चन्द्रशेखर, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यासजी सहित सभी विभागों के प्रधान सचिव एवं सचिव उपस्थित थे। 

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