राजभवन को नहीं बनने देगें भाजपा दफ्तर : तृणमूल

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नयी दिल्ली,05जुलाई, पश्चिम बंगाल के उत्तरी परगना जिले के बादुड़िया में भड़की सांप्रदायिक हिंसा कें संबंध में राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी द्वारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फोन पर की गई बातचीत से बेहद नाराज तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि वह राजभवन को भाजपा का कार्यालय नहीं बनने देगी। तृणमूल के वरिष्ठ नेता पार्थ चटर्जी ने आज एक निजी टेलीविजन चैनल से साक्षात्कार में कहा ‘ राज्यपाल ने जिस लहजे में मुख्यमंत्री से बात की वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे हमारी नेता बुरी तरह आहत हुई हैं। किसी ने हमारी नेता के खिलाफ कुछ भी कहा तो पार्टी उसे बर्दाश्त नहीं करेगी। हम राजभवन को भाजपा का कार्यालय नहीं बनने देंगे।’उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी काे इस बारे में पत्र भी लिखा है। सुश्री बनर्जी का आरोप है कि बादुड़िया हिंसा को लेकर राज्यपाल ने मंगलवार को उनसे धमकी भरे लहजे में बात की थी जो बेहद अपमानित करने वाला था। इससे वह इतनी आहत और अपमानित महसूस करने लगी थीं कि एक बार उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा देने की बात भी सोची थी। उन्होंने यहां तक कह डाला था कि राज्यपाल भाजपा ब्लाक स्तर के नेता की तरह बात कर रहे थे। वे इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती क्योंकि वे किसी राजनीतिक पार्टी या राज्यपाल की 'दया' से नहीं बल्कि आम लोगों के समर्थन से मुख्यमंत्री बनी हैं। हालांकि सुश्री बनर्जी के आरोपों के लगभग दो घंटे बाद ही राजभवन की ओर से जारी एक बयान में राज्यपाल ने सभी आरोपों का खंडन करते हए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से कोई आपत्तिजनक बात नहीं की। उनसे केवल कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बातचीत हुई। इसमें धमकी जैसी कोई बात नहीं थी। राज्यपाल ने इस मसले पर कल शाम गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी बात की थी। श्री सिंह ने सुश्री बनर्जी के आरोपों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए उनसे अनुरोध किया कि वह ऐसे मामलों में शिष्टाचार का पालन करें। लेकिन उनके इस अनुरोध के बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल पर आज फिर हमला बोला और कहा कि पार्टी राजभवन को भाजपा का कार्यालय नहीं बनने देगी आैर सुश्री बनर्जी के खिलाफ किसी तरह की टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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