स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जीएम सरसों का किया विरोध

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नयी दिल्ली 29 जुलाई, देश के प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से आनुवांशिक रूप से संवद्धित(जीएम) सरसों को व्यावसायिक खेती के लिए नहीं जारी करने का अनुरोध किया है। डॉ मीरा शिवा समेत 35 स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विकसित जीएम सरसों की व्यावसायिक खेती की अनुमति नहीं दिये जाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जीएम सरसों का मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर हो सकता है तथा मिट्टी पर भी विपरीत प्रभाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि जीएम सरसों किसानों, खेती से जुड़े मजदूरों और उपभोक्ताओं के लिए खतरनाक है। इसमें अब तक कोई अच्छाई नहीं दिखी है और न ही इस संबंध में कोई प्रमाण मिले हैं। दुनिया के अधिकतर देशों ने इसकी प्रौद्योगिकी से जुड़े खतरों के मद्देनजर जीएम सरसों की खेती को स्वीकार नहीं किया है। विशषज्ञों ने कहा कि दक्षिण अमेरिका के देशों में व्यापक पैमाने पर जीएम फसलों की खेती के कारण पर्यावरण पर हुए उसके दुष्प्रभाव से संबंधित अनेक रिपोर्ट हैं। चिकित्सकों ने कहा कि जीएम खाद्य पदार्थों को लेकर ऐसे वैज्ञानिक प्रमाण हैं जिससे साबित होता है स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर होता है। इनमें एलर्जी, पाचन तंत्र,अंगों के विकास तथा प्रजनन संबंधी समस्यायें पैदा होती हैं। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख लोगों में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अम्बुमणि रामदास, एम्स के पूर्व निदेशक डॉ ललितनाथ, डॉ वंदना प्रसाद, डॉ वी कृष्णमूर्ति, डॉ गोपाल काबडा, डॉ मोहन राव आदि शामिल हैं।

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