कैसे रुके आबादी, जब स्वास्थ्य केन्द्रों में नहीं नसबंदी की सुविधा

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नयी दिल्ली, 23 जुलाई, नियंत्रक एंव महालेखा परीक्षक (कैग) ने सरकार के जनसंख्या नियंत्रण के उपायों की पोल खाेलते हुए कहा है कि देश के चौदह राज्यों के 300 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में से 40 फीसदी में पुरुष या महिला नसबंदी की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। कैग ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रजनन और शिशु स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में 2012 से 2017 की अवधि में की गई जांच पर संसद में पेश रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आयी है जब सरकार ने देश में प्रजनन दर घटाने के लिए ‘परिवार विकास’ जैसा व्यापक अभियान चला रखा है। रिपोर्ट में अंडमान निकोबार द्वीप समूह, केरल, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड,एवं त्रिपुरा में किसी भी चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में महिला और पुरूष नसबंदी की सुविधा मौजूद नहीं होने की बात कही गई है जबकि अरूणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश और पंजाब में औसत 63 फीसदी में यह सुविधा नहीं होने का हवाला दिया गया है। हैरानी की बात यह है मध्यप्रदेश उन सात राज्यों में शामिल है जहां परिवार विकास अभियान के तहत प्रजनन दर घटाकर दो फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट में महिला और पुरुषों के बीच नसंबदी के मामलों में भी भारी अंतर का खुलासा करते हुए कहा गया है कि 28 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में कुल नसबंदी के मामलों में पुरुष नसबंदी का अनुपात महज 2.3 प्रतिशत पाया गया है। इसमें नसंबदी के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि तथा दोषपूर्ण नसबंदी या फिर नसबंदी से होेने वाली मृत्यु के मामलों में क्षतिपूर्ति भुगतान में भी कई विसंगतियों की बात कही गई है। कैग ने इस संबंध में अपने सुझावों में कहा है कि प्रत्येक स्वास्थ्य केन्द्र में नसबंदी के साथ ही परिवार नियोजन के सभी साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। नसबंदी के आपरेशन सही चिकित्साकर्मियों की देख रेख में होने चाहिए ताकि किसी तरह की जटिलताएं न पैदा हो। परिवार नियोजन के उपायों के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि या क्षतिपूर्ति राशि का बंटवारा सुसंगत तरीके से करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

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