सत्रह साल के लम्बे सफर के बाद जीएसटी पहुंचा मुकाम पर

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नयी दिल्ली 30 जून, “एक राष्ट्र, एक कर” की अवधारणा को साकार करने वाले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को अपना सफर पूरा करने में सत्रह वर्ष का समय लगा, राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आजादी के बाद के सबसे बड़े आर्थिक सुधार (जीएसटी) को संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित भव्य जलसे में आज मध्य रात्रि इसका श्री गणेश किया। जीएसटी की परिकल्पना की शुरूआत तत्कालिन वित्तमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 1986-87 के बजट में की थी। उन्होंने उत्पाद शुल्क ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव किया था और वर्ष 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस अवधारणा को पेश किया। इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बर ने 28 फरवरी 2006 को बजट पेश करते हुए जीएसटी के क्रियान्वयन के लिये एक अप्रैल 2010 की तारीख तय की थी। वर्ष 2009 में विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति ने जनता के विचारार्थ इसे पेश किया। वर्ष 2011 में 155वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया और 2013 में संसद की स्थाई समिति ने सौंपी रिपोर्ट में इसे और बेहतर बनाने के सुझाव दिये। मई 14 में नरेन्द्र मोदी की सरकार ने जीएसटी को लागू करने की दिशा में गंभीर प्रयास शुरू कर दिये और राज्यों की सहमति के लिये ताबड़तोड़ बैठकों का दौर शुरू हुआ। लोकसभा में 19 दिसंबर 2014 को 122वां संविधान संशोधन पेश किया गया। पिछले साल सितंबर में राष्ट्रपति ने इस विधेयक को अपनी मंजूरी दी। इस वर्ष 16 जनवरी को वित्त मंत्री अरूण जेटली ने एक जुलाई 2017 जीएसटी के क्रियान्वयन की डेडलाइन रखी। श्री जेटली ने 27 मार्च को केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी), एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी), केन्द्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर (यूटीजीएसटी) और क्षतिपूर्ति विधेयक संसद में रखे। लोकसभा और राज्यसभा ने सभी चार प्रमुख विधेयकों सीजीएसटी, आईजीएसटी, क्षतिपूर्ति कानून और केन्द्र शासित जीएसटी विधेयकों पर मुहर लगाकर इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ कर दिया। जीएसटी में 5,12,18 और 28 प्रतिशत की कर दरें रखी गई है। सहमति नहीं बन पाने के कारण पेट्रोल, डीजल और शराब को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

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