पिछले ढाई वर्षों में झारखंड विकास की नई ऊंचाई पर : रघुवर दास

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रांची 21 जुलाई, झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज कहा कि पिछले ढाई वर्ष की स्थिर सरकार की बदौलत राज्य ने विकास की नई ऊंचाइयाें को छुआ है। श्री दास ने यहां नीति आयोग के दल के साथ हुई बैठक के बाद कहा कि पिछले ढाई वर्ष की स्थिर सरकार के बल पर झारखंड ने विकास की नई ऊंचाइयाें को छुआ है। लेकिन, राज्य को आज भी केन्द्र से शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विकास के लिये कई ठाेस कदम उठाए हैं आैर झारखंड विकास के कई पायदानाें में अव्वल राज्यों की श्रेणी में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 70 साल में झारखंड का विकास उपेक्षित रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अलग राज्य का गठन कर इसके विकास की नई नींव रखी थी। उन्हाेंने कहा कि पिछले 14 वर्षों की राजनीतिक अस्थिरता के कारण भी राज्य का अपेक्षित विकास नहीं हाे पाया। श्री दास ने कहा कि वर्ष 2018 तक सभी घरों में विद्युत सुविधा तथा सभी जिलों को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य में महिला साक्षरता दर में भी सुधार हुआ है। बालिका शिक्षा एवं जनजातीय समुदायों के शिक्षा एवं समग्र विकास के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। इस मौके पर मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने बताया कि देश की आैसत विकास दर 6.8 से आगे 8.6 प्रतिशत विकास दर के साथ टीम झारखंड की प्रतिबद्धता आैर कार्य की दिशा स्पष्ट है। उन्हाेंने कहा कि सुगम्य व्यापार की दृष्टि से झारखण्ड 96.5 प्रतिशत स्कोर के साथ अव्वल राज्यों की श्रेणी में खड़ा है। मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार का महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याण जैसे क्षेत्र में विशेष जाेर है। नीति, निवेश एवं कार्यान्वयन में राज्य के पास सबल नीति है और टीम झारखंड कार्यान्वयन के स्तर पर प्रतिबद्ध है। साथ ही बजट एवं निवेश में केन्द्र से आैर अधिक सहयाेग प्राप्त हाेगा ताे राज्य दीर्घस्थायी विकास के लक्ष्य को हासिल कर सकेगा। नीति आयोग के सदस्य डॉ वी. के. सारस्वत ने समीक्षा करते कहा कि हर क्षेत्र में झारखंड ने विश्वसनीय शुरूआत की है। विकास दर, माेमेंटम झारखंड के द्वारा एक डायनेमिक नेतृत्व, प्रभावशाली नीतियां आैर सफल कार्यान्वयन का निदर्शन हुआ है। उन्होंने कहा कि समावेश अर्थात अपने नॉलेज नीति संसाधन काे राष्ट्रीय स्तर पर समन्वयन आैर आदान-प्रदान के तहत स्वीकार करना चाहिए। 

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