दुमका : आचार्य पंकज जी स्मृति संध्या सह काव्य गोष्ठी का आयोजन

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) आचार्य ज्योतिन्द्र प्रसाद झा ’पंकज’ की 98 वीं जयंती (30 जून 2017) के सुअवसर पर सतीश स्मृति मंच व पंकज गोष्ठी न्यास के संयुक्त तत्वावधान में एसकेएमयू विवि, दुमका के अंग्रेजी विभाग के व्याख्याता प्रो0 अच्युत चेतन के शिव पहाड़ स्थित आवास पर दिन शनिवार की देर रात तक स्व0 पंकज स्मृति संध्या सह काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।  रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकता के इतिहासकार प्रोफेसर हितेन्द्र पटेल ने आचार्य स्व0 पंकज के अवदानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महान शिक्षाविद व साहित्यकार की स्मृति को सहेजकर ही वास्तविक अर्थ में संताल परगना के इतिहास को लिखा जाना संभव होगा। प्रखर स्वाधीनता सेनानी, समर्पित शिक्षक, उद्भट विद्वान, महान साहित्यकार व आचार्य के रूप में समादृत आचार्य पंकज की बहुमुखी प्रतिभा व बहुआयामी व्यक्तित्व एवं इस अंचल के चतुर्दिक विकास में उनके योगदानों को रेखांकित किए बिना संताल परनगा के इतिहास को सहेजा नहीं जा सकता। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य विद्वानों यथा-  एसकेएमयू विवि के डीन आॅफ कालेजेज व एस पी कालेज दुमका के प्राचार्य प्रोफेसर गगन ठाकुर, डा0 अजय कुमार सिन्हा, प्रोफेसर प्रशान्त सेन, डा0 धनंजय मिश्र, डा0 रंजन कुमार, भागलपुर विश्वविद्यालय के डॉ जी सी पांडेय, गोड्डा के चर्चित समाजसेवी डॉ अजित उर्फ महात्मा जी व अन्य ने आचार्य पंकज के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए साहित्य में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में साहित्यकार व पत्रकार  अमरेन्द्र सुमन, राजीव नयन तिवारी, विश्वजीत साहा, अशोक सिंह, नवीन गुप्ता, ऋतुराज कश्यप, अंजनी शरण, सौरभ सिन्हा, वीरेंद्र कुमार झा, बलराम सहाय व विद्यापति झा ने अपने-अपने विचारों के माध्यम से संताल परगना के साहित्यिक धरोहर साहित्यकार आचार्य पंकज को काव्यांजलि अर्पित किया। काव्य-गोष्ठी में संताल परगना महिला महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डॉ ललिता सहाय व एस के एम विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रोफेसर अच्युत चेतन ने पंकज जी की रचित कविताओं का पाठ कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया। वरिष्ठ अधिवक्ता बलराम सहाय की अध्यक्षता में संपन्न काव्य संध्या का  संचालन सतीश स्मृति मंच के समर्पित हस्ताक्षर विद्यापति झा ने किया जबकि धन्यवाद व आभार पंकज गोष्ठी न्यास के चेयरमैन व दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर व इतिहासकार डा0 अमरनाथ झा ने किया। विदित हो डा0 झा आचार्य पंकज के सुपुत्र हैं जिन्होंने आचार्य पंकज की साहित्यिक पांडुलिपियों को सहेजते हुए उसके प्रकाशन की दिशा में इन दिनो जी-जान से जुटे हुए हैं। 

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